Bhopal News: भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। तमाम प्रयासों के बाद भी बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई प्रदेश से खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसका कारण यह है कि आज भी सामाजिक जागरूकता की कमी है। सामाजिक कुरीतियाें पर रोक इसलिए नहीं लग पा रहा है, क्योंकि लोग जागरूक नहीं है। इसके लिए शिक्षित समाज बनाना होगा। यह बात कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रंस फाउंडेशन की ओर से बाल विवाह रोकने के लिए आयोजित सम्मेलन में डीसीपी विनीत कपूर ने कही। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन बाल विवाह मुक्त समाज तभी होगा। जब लोगों में जागरूकता आएगी।

इस दौरान फाउंडेशन के सदस्यों ने कहा कि भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में करीब आठ लाख लोगों का बाल विवाह हुआ है। यह संख्या देशभर में होने वाले कुल बाल विवाह का करीब सात प्रतिशत है। बाल विवाह के मामले में प्रदेश का देशभर में छठवां स्थान है। यह आंकड़ा चिंतित करने वाला है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में जुटी स्वयंसेवी संस्थाओं ने मध्यप्रदेश की इस स्थिति पर चिंता जताई और सरकार से अपील की कि बाल विवाह रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन करवाया जाए, ताकि बाल विवाह की बुराई को खत्म किया जा सके। यह सम्मेलन मप्र महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर किया गया।

सदस्यों ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि साल 2019-2021 तक प्रदेश में केवल 13 बाल विवाह के मामले ही दर्ज किए गए। यह काफी चौंकाने वाला है। इससे साफ है कि बाल विवाह के मामलों में पुलिस के पास शिकायत ही नहीं की जा रही है। सम्मेलन में इस पर गंभीरता से विमर्श हुआ। साथ ही लोगों से, सरकार व सुरक्षा एजेंसियों से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की अपील भी की गई। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेश तोमर और फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक राकेश सेंगर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहें।

समाज को एकजुट होना होगा

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेश तोमर ने बाल विवाह को एक जटिल समस्या बताते हुए कहा कि यह प्राचीन काल से चला आ रहा है और इसलिए लोग इसे परंपरा मानकर मान्यता देते आए हैं। यही कारण है कि इसे रोकने में मुश्किलें सामने आती है। बाल विवाह को रोकने के लिए सभी विभागों व नागरिक संगठनों को एकजुट होकर काम करना होगा।

Posted By: Lalit Katariya

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