भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। नेहरू नगर स्थित बालिका गृह में राजधानी के बहुचर्चित नाबालिगों के यौन शोषण मामले की एक पीड़िता की मौत के बाद शुक्रवार को मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मप्र मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में कलेक्टर को पत्र लिखकर तीन दिन के अंदर सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। आयोग ने जानकारी मांगी है कि बच्चियों तक गोलियां कैसे पहुंची, क्या उन्हें डिप्रेशन या नींद की गोलियां प्रिस्क्राइब की गई थीं। यदि की गई थीं तो गोलियां किसकी देखरेख में दी जा रही थीं। पीड़िताओं में क्या एक ही बच्ची की तबीयत खराब हुई थी। यदि अन्य पीड़िताओं की तबीयत खराब हुई है तो उन्हें क्या चिकित्सा उपलब्ध कराई गई।

बाल आयोग ने यह जानकारी मांगी

- कितनी बच्चियों का मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा था, किस डॉक्टर का इलाज चल रहा था। बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कब-कब कराया गया।

- क्या बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) ने बच्चियों की होम स्टडी की है तो उपलब्ध कराएं।

- सीडब्ल्यूसी भोपाल में कितने मामले लंबित हैं।

- डीसीपीयू या सीडब्ल्यूसी द्वारा पांच पीड़ित बालिकाओं को कितनी बार काउंसिलिंग कराई गई। रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

- जिला निरीक्षण कमेटी द्वारा नियमानुसार कितनी बार बालिका गृह का निरीक्षण किया गया एवं निरीक्षण में पाई गई कमियों में सुधार के लिए क्या कार्यवाही की गई।

- क्या बालिका गृह में बाल समिति गठित है, इस समिति ने पीड़ित बालिकाओं के संबंध में कोई महत्वपूर्ण जानकारी दी हो तो उस पर क्या कार्यवाही की गई, उपलब्ध कराएं।

सांस लेने में दिक्क्त होने पर एक बालिका जेपी में भर्ती

बालिका गृह में रह रही पांचों बालिका में से एक को घबराहट और सांस फूलने की शिकायत होने पर जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जेपी अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ दिनेश गर्ग उसका इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लड़की की हालत स्थिर है। ब्लड प्रेशर भी सामान्य है। कोई गंभीर समस्या नहीं लग रही है।

मप्र मानव अधिकार आयोग ने मांगा प्रतिवेदन

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने पीड़िता की संदिग्ध मौत पर संज्ञान लेकर पुलिस महानिदेशक, मप्र, उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल, कलेक्टर भोपाल एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक और मप्र शासन से अतिशीघ्र प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने इसे मानव अधिकार हनन मानते हुए मामले में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है।

अन्य परिजन पहुंचे सीडब्ल्यूसी

दूसरी ओर मामले से जुड़े अन्य चार बालिकाओं के परिजन उन्हें घर ले जाने के लिए समिति कार्यालय पहुंचे। परिजनों ने इसके पहले कलेक्टर भोपाल से भी मुलाकात की कोशिश की थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। समिति कार्यालय पहुंचे परिजन का कहना था कि मामले को करीब सात माह होने आए हैं। यदि कोर्ट में केस 20 साल चला तो क्या उनकी बच्चियां बालिका गृह में ही रहेंगी।

Posted By: Lalit Katariya

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