भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। पुराने शहर के चौक में स्‍थित जामा मस्जिद का पुरातात्‍विक सर्वेक्षण कराने की मांग को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। संस्कृति बचाओ मंच ने बुधवार को पुराने शहर के चौक की जामा मस्जिद का पुरात्तव सर्वेक्षण कराने की मांग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से की थी। गुरुवार को संस्कृति बचाओ मंच के पदाधिकारियों ने गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात कर इस संदर्भ में ज्ञापन दिया था। अब इस मामले में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी सहित अन्य मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा कि हमारे पास सभी कागजात मौजूद हैं। मस्जिद में मंदिर मिलने के प्रमाण असत्य हैं। धर्मगुरुओं ने सभी से अपील की है अफवाहों पर ध्यान न दें। इंटरनेट मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रम पर बिल्कुल न आएं।

इधर संस्कृति मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी अपने दावे पर अटल हैं। उन्होंने अपनी बात फिर दोहराई है कि भोपाल की जामा मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह बाग पद्धति पर आधारित है। मजिस्द का इतिहास पुराना है। भोपाल रियासत की शासिका रहीं सुल्तान जहां बेगम ने अपनी किताब हयाते कुदसी में जिक्र किया है। पहले यहां पर हिन्दुओं का पुराना मंदिर हुआ करता था। मंदिर का पुरात्तव सर्वेक्षण कराने की मांग मुख्यमंत्री व गृहमंत्री से की है। उत्तर प्रदेश की ज्ञानवापी मस्जिद में भगवान शिवजी का शिवलिंग मिला है। उसी तरह पुराने शहर के चौक बाजार की जामा मजिस्द में मूर्तियां मिलेंगी। जामा मस्जिद का निर्माण 1857 में हुआ था। पुराना मंदिर तोड़ कर मजिस्द बनाई गई थी। उस समय इसकी लागत पांच लाख रुपये आई थी। दि ठीक से सर्वेक्षण हुआ तो मंदिर होने के प्रमाण जरूर मिलेंगे।

Posted By: Ravindra Soni

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