Bhopal News : भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। वायु प्रदूषण की बात करें तो आमतौर पर वाहनों और फैक्ट्रियां ही जहन में आती हैं। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी कि जितना प्रदूषण 10 लाख चार पहिया वाहन 24 घंटे में फैलाते हैं, उतना प्रदूषण एक 80 सीटर क्रूज अकेले फैलाने का दम रखता है। इस हिसाब से भोपाल में बढ़ रहे वायू प्रदूषण में बड़ी झील में चलने वाली क्रूज लेक प्रिंसेस की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। दरअसल यह बात नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर याचिका में कही गई है। यही नहीं इस मुद्दे पर एनजीटी ने मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन, मध्य्प्रदेश पर्यटन निगम, भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन, वेटलैंड एथॉरिटी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और पर्यावरण विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

दरअसल भोपाल की बड़ी झील में एक दशक से ज्यादा समय से क्रूज का संचालन किया जा रहा है। जबकि अब सरकार नर्मदा नदी सहित छह नदियों और कोलार डैम, हलाली डैम और ग्वालियर के तिगरा डैम सहित अन्य नदियों और बांध क्षेत्रों में 21 जगहों पर क्रूज चलाने की तैयारी में है। इसके खिलाफ पर्यावरणविद् सुभाष चंद्र पांडे ने एनजीटी में 71 पेज की याचिका लगाई है। इस याचिका में पांडे में क्रूज से होने वाले प्रदूषण का हवाला रिपोर्ट के आधार पर दिया है। इसी आधार पर एनजीटी ने सरकार सहित जिम्मेदार विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

रिसर्च में साबित हुआ है

पांडे ने बताया कि 100 पैसेंजर का क्रूज शिप से 24 घंटे में 10 लाख कारों के बराबर प्रदूषण पैदा होता है। यह रिसर्च में सामने आया है। वायू मंडल में प्रदूषण बढ़ने से नाइट्रोजन और सल्वर जैसे तत्वों वाली अम्लीय वर्षा की संभावना बढ़ जाएगी। यही नहीं जिन जल रशियों में क्रूज चलाए जा रहे हैं या चल रहे हैं उनका पानी धीरे-धीरे जहरीला हो जाएगा। जिसकी वजह से जलीय जंतु खत्म हो जाएगी। यही नहीं बड़ी झील में क्रूज चलाना भोपाल मास्टर प्लान 2005 और अन्य पर्यावरण संबंधी कानूनों का सरासर उल्लंघन है। इसमें जलस्रोतों के आसपास ग्रीन बेल्ट और क्षेत्रीय और वनस्पति उद्यान विकसित करने के स्पष्ट प्रावधान हैं।

क्या में क्या कहा गया है

याचिका में बताया गया है कि राज्य के बहुमूल्य और पेयजल आपूर्ति वाले जलस्रोतों में नियमविरूद्ध तरीके से क्रूज चलाए जा रहे हैं। भोपाल की बड़ी झील से लाखों लोगों को पेयजल आपूर्ति होती है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की रामसर साइट भी है फिर भी इसमें पर्यटन विभाग द्वारा क्रूज चलाया जा रहा है। जल्द ही पवित्र नदी नर्मदा सहित अन्य जलस्रोतों में 21 और क्रूज चलाने की योजना है। जबकि इन जलाशयों बांधों और नदियों का पानी पेयजल सप्लाई के साथ आचमन धार्मिक अनुष्ठानों मछली पकड़ने सिंचाई आदि के लिए भी लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।

Posted By: Lalit Katariya

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close