भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम भोपाल जलशोधन संयंत्रों से जलशुद्धीकरण के बाद निकलने वाले गंदे पानी का पुन: शुद्धिकरण कर उपयोग करेगा। इसके लिए शहर के तीन जलशोधन संयंत्रों में पानी के पुन: शुद्धिकरण संयंत्र (री-साइकिल प्लांट) लगाए जाएंगे। इनमें डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका फायदा यह होगा कि जलशोधन के बाद नालों में बहाया जाने वाला प्रतिदिन लाखों लीटर गंदे पानी को फिर से इस्‍तेमाल करने लायक बना दिया जाएगा। इससे प्रतिदिन 90 लाख लीटर पानी का अपव्यय रुकेगा।

बता दें कि शहर में जलापूर्ति की पाइप लाइन और पानी की टंकियों से होने वाली पानी की बर्बादी (लाइन लास) रोकने के लिए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक 'स्काडा" का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसके बावजूद जलशोधन संयंत्रों से वाटर ट्रीटमेंट के दौरान निकलने वाला गंदा पानी नालियों में बहा दिया जाता है। निगम के आंकड़ों के अनुसार फिल्टर प्लांट की क्षमता का 10 फीसद पानी बैक वाशिंग में बर्बाद हो जाता है। लेकिन, अब इस पानी को इकट्ठा कर इसका ट्रीटमेंट कर इसे सप्लाई किया जाएगा। ऐसे में रोजाना शहर में चार लाख आबादी की जरूरत का पानी और मिल सकेगा। फिल्टर प्लांटों में वेस्ट वाटर इकट्ठा करने के लिए स्लज टैंक बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।

जलशोधन के बाद ऐसे बचेगा पानी

पानी बचाने की प्रक्रिया को मनुआभान टेकरी जलशोधन संयंत्र से समझें तो यह 50 एमएलडी का संयत्र है। इससे रोजाना 10 फीसद यानी पांच एमएलडी वेस्ट वाटर निकलता है, जो बैक वाशिंग में निकलता है। वर्तमान में यह पानी नाले में बहा दिया जाता है। लेकिन, अब इस पानी को स्लज बैड (एक टैंक) में इकट्ठा किया जाएगा। जब पानी में मौजूद गंदगी स्लज की लेयर नीचे जम जाएगी तो साफ पानी को एरिएटर (कच्चे पानी के टैंक) में वापस डाल दिया जाएगा। यहां से पानी दोबारा फिल्टर होकर सप्लाई किया जा सकेगा। इससे प्रतिदिन 50 लाख लीटर पानी की बचत होगी। इसी तरह केरवा और बैरागढ़ में भी दो-दो एमएलडी का वाटर री-साइकिल प्लांट लगाया जाएगा। जिससे प्रतिदिन 40 लाख लीटर पानी की बचत होगी।

जल शोधन के दौरान प्रतिदिन निकलने वाले पानी को दोबारा एकत्र कर शुद्धिकरण किया जाएगा, ताकि पानी का अधिक से अधिक सदुपयोग हो और पानी के अपव्यय को रोका जा सके।

- केवीएस चौधरी, आयुक्त, भोपाल नगर निगम

Posted By: Ravindra Soni

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close