विश्‍वास चतुर्वेदी भोपाल, । अब लोगों को काम करने के लिए घर से बाहर जाने की जरूरत नही है। घर पर रहकर भी कमाई की जा सकती है। वीरा नाम का स्टार्टअप लोगों को आजादी के साथ काम करने की सहूलियत दे रहा है। भिन्न-भिन्न व्यवसाय के लोग कोसों दूर बैठकर अपने विशेषज्ञता से संबंधित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। अप्रैल 2021 से शुरु हुए इस स्टार्टअप में अब तक 90 देशों के 5 हजार से अधिक प्रोफेशनल जुड़ चुके हैं। कंपनी लोगों को स्थाई नौकरी पर नहीं रखती है, बल्कि जितना लोग काम करते हैं, उसका भुगतान किया जाता है। कंपनी अभी 101 सेक्टर में काम कर रही है, इसके अब 300 से अधिक क्लांइट हैं।

वीरा के फाउंडर शुभम शर्मा सिविल इंजीनियंरिंग में बीटेक कर चुके हैं। इसके बाद वो बच्चों को बैंक व पीएससी की कोचिंग देने का काम करते थे। इस दौरान उनके कुछ परिचित छात्रों ने उनसे अानलाइन क्लासेस लेना शुरु कर दी। तब उनके मन में ख्याल आया कि आनलाइन तो लोगों को कहीं भी पढ़ाया जा सकता है। लेकिन इस बात का डर था कि लोग पैसे नहीं देंगे, ताे क्या करेंगे। काफी सोचने के बाद तय किया कि इनके बीच किसी एजेंसी का होना जरुरी है, जो पैसे और काम के गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सके। तब वीरा का ख्याल आया और हमने ग्राहकों और पेशेवरों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए वीरा की शुरुआत की।

कोरोना ने बढ़ाई उम्मीद

शुभम शर्मा ने बताया कि कोरोना काल के दौरान लोग अपने घरों में कैद थे। कंपनियां अपने कर्मचारियों से वर्क फ्राम होम करवा रही थी। इस दौरान हमें लगा कि व्यापार में कूदने का ये सही समय है। तब तक हम केवल आनलाइन ट्यूशन ही उपलब्ध करवा रहे थे। लेकिन इसके बाद हमने आइटी, बैकिंग, लीगल व बैंक समेत 101 प्रकार के कार्य करने के लिए नियोक्ताओं को स्वतंत्र पेशेवरों की आपूर्ति करना शुरु किया।

कनाडा से मिला 20 लाख रुपये का काम

वीरा को कनाडा की आइटी कंपनी से 20 लाख रुपये का काम मिला है। इसके तहत कंपनी दस से अधिक आईटी पेशेवरों को घर बैठे काम दे रही है। इसके अलावा कंपनी अमेरिका, आस्ट्रलिया, ब्रिटेन, जर्मनी समेत 90 देशों में अपना विस्तार कर चुकी है। भारत के मेट्रो शहरों से भी कंपनी को बेहतर रिस्पासं मिल रहा है। इसमें अभी कंपनी के पास मुबंई, पुणे, गुजरात, जयपुर, भोपाल समेत अन्य बड़े शहरों के क्लाइंट भी जुड़े हैं।

ऐसे करती है काम

क्लाइंट वीरा को काम की प्रोफाइल भेजते हैं। इसके बाद उन्हें कोटेशन और पेशेवरों की प्रोफाइल भेजी जाती है। जब वो सहमति दे देते हैं, तो उनसे रुपये जमा करवा लिया जाता है। इसके बाद उच्च कोटि के पेशेवरों को काम सौंपा जाता है। जब तक काम खत्म नहीं हो जाता, पैसा वीरा के पास जमा रहता है। इसके बाद जैसे-जैसे कार्य की प्रगति होती है, पैसा भी उसी दर से रिलीज किया जाता है। जिससे क्लाइंट व पेशेवरों के बीच विश्वास का संतुलन बना रहता है।

बी नेस्ट से मिली उर्जा

शुभम शर्मा ने बताया कि स्मार्ट सिटी के बीनेस्ट इंन्क्यूबेशन सेंटर से उनके स्टार्टअप को ऊर्जा मिल रही है। इसी की वजह से बीरा को लोग देश-बिदेश में पहचानने लगे हैं। बीनेस्ट स्टार्टअप को योजना, तकनीकी व कार्य व्यवहार का कौशल प्रदान करता है। साथ ही सीड फंडिंग के लिए भी सरकारी एजेंसियों को अप्रोच करता है। बीनेस्ट से किलने वाले इंक्यूबेटर्स को भी सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ दिया जा रहा है।

चार साल में निकले 132 स्टार्टअप

स्मार्ट सिटी के सीईओ अंकित अस्थाना ने बताया कि 2018 में भोपाल स्मार्ट सिटी में प्रदेश के पहले सरकारी इंक्यूबेशन सेंटर की शुरुआत की गई थी। तब से अब तक 132 से अधिक इंक्यूबेटर्स यहां से निकलकर अपने स्टार्टअप को उड़ान दे रहे हैं। इनमें 40 स्टार्टअप एक करोड़ रुपये से दस करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार कर रहे हैं। प्रत्येक बैच में यहां पचास इंक्यूबेटर्स का चयन किया जाता है। इसके बाद उन्हें आवश्यक सुविधाएं और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

Posted By: Lalit Katariya

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