भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। सिंधी समाज के महान दार्शनिक संत साधु टीएल वासवानी की जयंती शुक्रवार 25 नवंबर को देश भर में शाकाहार दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर संत हिरदाराम नगर में सैकड़ों बच्चों ने मांसाहार का त्याग कर शाकाहार अपनाने का संकल्प लिया। ऐसे बच्चों को सुधार सभा की ओर से सम्मानित भी किया गया।

मुख्य कार्यक्रम सुधार सभा द्वारा साधु वासवानी मैदान पर आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में शिक्षाविद विष्णु गेहानी ने कहा कि मांस हमारा भोजन नहीं है। शाकाहार ही हमारा भोजन है। साधु वासवानी मिशन से जुड़ी डा राजकुमारी चोटरानी ने कहा कि साधु वासवानी ने हमेशा ही जीव दया का संदेश दिया। प्राणियों पर दया करना ही मनुष्य धर्म है। पशु-पक्षियों को काटकर खाना हमारी संस्कृति नहीं है। जीव सेवा संस्थान के सचिव महेश दयारामानी ने कहा कि साधु टीएल वासवानी और मानव सेवा के प्रतीक संत हिरदाराम जी ने हमेशा शाकाहार पर जोर दिया। दोनों संतों की एक बार मुलाकात भी हुई थी। दादा वासवानी की तरह नूरी ग्रंथ का आज समापन हुआ। इस पाठ में दादा ने निरीह प्राणियों पर दया करने का संदेश दिया है। यहां पिछले 15 दिनों से पाठ चल रहा था।

पशु-पक्षियों का रूप धारण किया बच्‍चों ने

इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने शाकाहार रैली निकाली। नारे लगाते हुए सभी से पशुओं पर दया करने की अपील की। साथ ही शाकाहारी बनने का आह्वान भी किया। रैली संत हिरदाराम नगर के विभिन्न मार्गों की परिक्रमा करते हुए साधु वासवानी मैदान पहुंची। कुछ बच्चे पशु पक्षियों का रूप धारण करके आए थे। हाथों में तख्तियां लिए बच्चों ने शाकाहारी बनने का संदेश दिया। नवयुवक सभा भवन में भी शाकाहार दिवस मनाया गया। सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी साधु वासवानी का जन्मोत्सव शाकाहार दिवस के रुप में मनाया।

Posted By: Ravindra Soni

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close