Bhopal News : भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सीमेंट में पाए जाने वाले सभी रासायनिक पदार्थ, बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (उड़ने वाली राख) में भी पाए जाते हैं। इस कारण मैनिट के दो प्रोफेसरों ने काफी शोध के बाद फ्लाई ऐश और जियो पालीमर से पेवर ब्लाक बनाने में सफलता पाई है। तीनों की इस नई खोज को भारत सरकार ने पेटेंट भी प्रदान किया है। नई खोज पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस खोज से बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख से पेवर ब्लाक बनेंगे और पर्यावरण प्रदूषण रुकेगा। माैलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. डा. सविता दीक्षित और मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. डा. गजेंद्र दीक्षित और एक स्कालर सुबोध कुमार ने संयुक्त रूप से इस नई खोज का आविष्कार किया है।

डॉ. सविता दीक्षित और उनके पति डॉ. गजेंद्र दीक्षित दोनों संयुक्त रूप से पिछले 20 वर्षों से निरन्तर अपनी खोजों से पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोग में लाने हेतु शोध कार्य कर रहें हैं। दोनों लंबे समय से बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश व जियो पॉलीमर से पेवर ब्लाक बनाने पर शोध कर रहे थे।

सर्वाधिक उत्सर्जित अपशिष्ट है फ्लाई ऐश

फ्लाई वेस्ट पूरी दुनिया में मानव द्वारा सबसे ज्यादा उत्सर्जित होने वाला अपशिष्ट पदार्थ है। इसके कारण पर्यावरण पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नई शोध से फ्लाई ऐश का सकारात्मक उपयोग होगा। इससे हमारे पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधनों को होने वाले नुकसान को भी भविष्य में रोका जा सकेगा। वहीं फ्लाई ऐश से बने पेवर ब्लाक का उपयोग घरों, सड़कों और उद्यानों सहित अन्य जगहों पर किया जाता है।

वजन में होंगे हल्के

वर्तमान में जो पेवर ब्लाक उपयोग किए जाते हैं, वे सीमेंट, रेत और कंकड़ से मिलकर बने होते हैं। इस कारण इनका वजन काफी बढ़ जाता है। इस कारण डा. सविता दीक्षित ने बड़े-बड़े बिजली संयंत्रों से निकलने वाले फ्लाई ऐश से ब्लाक बनाने के बारे में सोचा। फ्लाई ऐश और जियो पालीमर का इस्तेमाल कर बनाए गए पेवर ब्लाक वजन भी कम होती है। नवीन शोध से बने पेवर ब्लाक को वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले सीमेंट, कंक्रीट से मिलकर बने पेवर ब्लाक के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

Posted By: Lalit Katariya

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