भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। जिनके हौसले बुलंद होते है वे मुसीबतों से डरते नहीं बल्कि सामना करते है। और हर वह मुकाम कायम करते है जो वे चाहते है। ऐसी ही संघर्ष की एक कहानी राजधानी की संगीता (परिवर्तित नाम) की सामने आई है। लॉकडाउन के दौरान पति ने दसवीं पास कहकर संगीता का साथ छोड़ा, तो उन्‍होंने अपनी 11 साल की बेटी और खुद को हिम्मत से संभाला। करीब 20 साल पहले छोड़ चुकी पढ़ाई एक बार फिर शुरू की और बारहवीं की परीक्षा उत्‍तीर्ण की। अब बीएएलएलबी की पढ़ाई कर रही है, ताकि उन पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए हरदम खड़ी हो सके, जिनको उनके अपनो ने ही बीच रास्ते में बेसहारा छोड़ दिया है। संगीता का कहना है कि पति के छोड़कर चले जाने पर बहुत हताश हुई, लेकिन बेटी का चेहरा देख फिर हिम्मत जुटाई और पढ़ाई शुरू की। संगीता के अनुसार बीते करीब डेढ़ साल में कई बार पुलिस विभाग सहित अन्य फोरम पर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी कोई राहत नहीं मिली। इस दौरान जब न्याय पाने के लिए परेशान हुई तो बीएएलएलबी करने की ठान ली। अब जीवन का सपना है कि एक बेहतर वकील बनकर उन पीड़िताओं की आवाज बनना है, जो अपनो की सताई हुई हैं।

पति तो नहीं आया, लेकिन चार माह बाद नोटिस आया

संगीता के अनुसार जब पति का अचानक घर से इस तरह जाना हुआ तो कुछ भी समझ नहीं आया। कई बार पति और ससुराल पक्ष से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया। करीब चार माह बाद जब एक नोटिस आया, तो उसे देखकर पैरों तले जमीन खिसक गई। नोटिस से पता चला कि पति ने साथ रहते हुए ही तलाक का केस दर्ज करा दिया था, जिसके बाद पूरी कहानी समझते देर नहीं लगी। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल आयोग, महिला आयोग सहित अन्य माध्यमों से पति से सुलह के प्रयास किए, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद न्यायालय की शरण ली और भरण-पोषण, घरेलू-हिंसा का केस दर्ज कराया। जो फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

Posted By: Ravindra Soni

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