भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अपनी मांगे मनवाने के लिए जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने गुरुवार से भोपाल समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समानांतर ओपीडी शुरू की है। 12 अप्रैल तक इसी तरह से ओपीडी चलाई जाएगी।इसी दिन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से मुलाकात के बाद मांगे नहीं मानी गईं तो जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन पूरी तरह से काम बंद कर हड़ताल पर चला जाएगा। ऐसे में कोविड-19 के दौरान मरीजों की फजीहत होना तय है। जूनियर डॉक्टर की सबसे बड़ी मांग है कि मेडिकल कॉलेजों में कोरोना के सिर्फ गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाए, जिससे एमडी-एमएस करने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। बता दें कि जूनियर डॉक्टरों ने महीने भर पहले भी हड़ताल की चेतावनी दी थी इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग ने उनकी मांगे हल करने का भरोसा दिलाया था। स्टेट जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अरविंद मीणा और गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल जूडा के सचिव डॉ. हरीश पाठक ने कहा कि कोविड-19 के दौरान जूनियर डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज किया है। इसके बाद भी शासन उनकी मांगों की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि 12 अप्रैल को मंत्री से मिलने के बाद भी मांगे पूरी नहीं हुई तो जूडा अब हड़ताल करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

यह है मांगे

--मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में कोरोना के सिर्फ गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाए। जिससे चिकित्सा छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

--जूनियर डॉक्टरों ने पिछले 1 साल में अपनी सारी परेशानी भूल कर मरीजों की सेवा की है। लिहाजा उनकी एक साल की शिक्षण शुल्क माफ की जाए।

--जूनियर डॉक्टरों का मानदेय पिछले 3 साल से नहीं बढ़ा है, जबकि मुख्यमंत्री ने हर साल 6 परसेंट बढ़ाने की बात कही थी। 3 साल के मिलाकर 18 फीसद मानदेय बढ़ाया जाए।

--कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों को सरकार ने 10 हजार रुपए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की बात कही थी। एक साल बाद भी यह राशि नहीं मिली है।

--जूनियर डाक्टरों के एक ऐसा प्रशस्ति पत्र दिया जाए भविष्य में जब भी वह किसी विभाग में सेवा के लिए आवेदन करें तो उन्हें 10 नंबर अतिरिक्त मिले।

वार्ड और ओपीडी में एसआर और कंसलटेंट ने संभाली जिम्मेदारी

हमीदिया अस्पताल में जूडा की समानांतर ओपीडी सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली । इस दौरान वार्ड, ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर में कोई जूनियर डॉक्टर नहीं था। यह जिम्मेदारी कंसलटेंट यानी बड़े डॉक्टर और सीनियर रेसीडेंट्स ने निभाई । 2 बजे के बाद जूनियर डॉक्टर रोज की तरह काम पर आ गए। समानांतर ओपीडी में जूडा ने 80 मरीज देखे।

Posted By: Lalit Katariya

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