Bhopal News : भोपाल नवदुनिया प्रतिनिधि। संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने 2018-19 में भिक्षावृत्ति पर रोक के लिए खुशहाल नौनिहाल योजना चलाई थी। इसके तहत राजधानी में अभियान चलाया गया था, लेकिन इस योजना का कोई भी लाभ नहीं मिला। फिर से बच्चे सड़कों पर भीख मांगते नजर आ रहे हैं। राजधानी के सभी चौक-चौराहों पर इस अभियान के तहत 350 से अधिक ऐसे बच्चों को रेस्क्यू किया गया था कि जो चौराहों पर भीख मांगते रहते हैं। ऐसे बच्चों की बेहतरी के लिए महिला बाल विकास विभाग, चाइल्ड लाइन की टीम ने मिलकर अभियान चलाया था। इसमें चाइल्ड लाइन और महिला बाल विकास विभाग की टीम की ओर से राजधानी के चौक-चौराहों पर अभियान चलाया गया था। इसके तहत 350 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया था, लेकिन इसमें आधे अधिक बच्चे फिर से भिक्षावृत्ति में जुड़ गए हैं। ऐसे में कोई भी अभियान सफल होना संभव नहीं है। चाइल्ड लाइन ने कई ऐसे भीख मांगने वाले बच्चों को रेस्क्यू किया था, जिनके अभिभावक भी इसमें शामिल थे। ऐसे कई मामले में एफआइआर भी कराई गई थी, लेकिन फिर से बच्चे भीख मांगने में जुट गए हैं।

अभिभावक ही बच्चों से मंगवाते हैं भीख

चाइल्ड लाइन ने बताया कि खुशहाल नौनिहाल अभियान के तहत राजधानी के मुख्य चौराहे बोर्ड आफिस, ज्योति टाकीज, भारत टाकीज, अशोका गार्डन, गांधी नगर बस स्टैंड के पीछे आदि जगहों से भीख मांगते बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। जब इनकी काउंसलिंग की गई तो पता चला कि अभिभावक ही बच्चों से भीख मंगवाते हैं। सभी एक-दूसरे को रिश्तेदार बताकर कार्रवाई होने से बच निकलते हैं।

कोरोना काल में फिर से भीख मांगने लगे बच्चे

चाइल्ड लाइन ने बताया कि कई बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया था। यहां तक कि कोविड काल में बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया और माता-पिता का रोजगार छूटा तो वे फिर से भीख मांगने लगे हैं। चाइल्ड लाइन ने 22 बच्चों को पुर्नवास पर काम किया था और स्कूल में प्रवेश दिलाया है। अब इसमें से करीब 12 बच्चे अभी संपर्क में हैं।

केस-1

ज्योति टाकिज चौराहे पर एक युवक चार साल के बच्चे के सिर पर पट्टी बांधकर राहगीरों को दवाई का एक पर्चा दिखाकर बच्चे के बीमार होने की दुहाई देते हुए भीख मांग रहा था। चाइल्ड लाइन ने मामले में तुरंत कार्रवाई की। टीम के सदस्यों ने जब बच्चे की पट्टी खोलकर देखा तो चोट के निशान नहीं थे। पूछताछ करने पर युवक ने खुद को बच्चे का मौसेरा भाई बताया। मामले में एफाआइआर दर्ज कराई गई थी।

केस-2

भारत टाकिज के पास सात और आठ साल के दो बच्चियों को भीख मांगते हुए रेस्क्यू किया गया था। चाइल्ड लाइन ने जब बच्चियाें की काउंसलिंग की तो पता चला कि उनके माता-पिता और भाई भी पास के चौराहे पर भीख मांग रहे हैं। इन बच्चियों को स्कूल से प्रवेश दिलाया गया था, लेकिन फिर से भीख मांग रही हैं।

वर्जन

-भिक्षावृत्ति में शामिल ऐसे परिवारों को चिन्हांकन करना होगा और उनके लिए रोजगार और पुर्नवास की व्यवस्था की जाए। तभी बच्चे शिक्षा से जुड़ पाएंगे। अगर रोजगार नहीं होगा तो वे फिर से भिक्षावृत्ति से जुड़ जाएंगे।

अर्चना सहाय, डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन

Posted By: Lalit Katariya

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