भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। बड़ा तालाब राजधानी की लाइफ लाइन (जीवनदायिनी) है, जबकि इसकी लाइफ लाइन कोलांस नदी है, जो जिम्मेदारों की अनदेखी एवं लापरवाही का शिकार हो गई है। वर्षों से नदी के जीर्णोंद्धार या गहरीकरण को लेकर कोई प्रयास नहीं हुए। हां, कागजों में हर दूसरे-तीसरे साल प्लानिंग जरूर बनती है, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतरती। नदी संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि बड़ा तालाब को जिंदा रखना है तो कोलांस नदी के संरक्षण एवं संवर्धन करने की जरूरत है। तभी भोपाल की तस्वीर संवरेंगी। कोलांस ही एक मात्र नदी है, जिसका पानी तालाब में पहुंचता है। वर्तमान में नदी अतिक्रमण एवं नालों की वजह से न सिर्फ सिमटकर रह गई है, बल्कि मैली भी हो रही है।

कोलांस नदी सीहोर जिले से निकली है, जो भोपाल में आकर बड़ा तालाब से मिलती है। यही तालाब का प्रमुख कैचमेंट एरिया है, लेकिन इसी नदी के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर ठोस प्रयास नहीं हुए हैं। भोपाल एवं सीहोर जिला स्तर पर अब तक ठोस प्लान तैयार नहीं हुआ, जबकि कोलांस के रूट को उज्जैन की शिप्रा नदी जैसा विकसित किया जाना चाहिए था। पक्के घाट एवं नालों को रोकने की कार्रवाई होना चाहिए थी, जो नहीं हो पाई।

चौड़ाई भी घटी, मिलता है नाले का पानी

कोलांस नदी का पाट पहले 45 मीटर चौड़ा हुआ करता था, जो अब घटकर लगभग 10 मीटर से भी कम हो गया है। कुछ जगह गंदे नाले भी मिल रहे हैं। पर्यावरणविद् बताते हैं कि कोलांस नदी के संरक्षण क दिशा में ठोस कदम न उठाए जाने की वजह से ही इसकी चौड़ाई कम हो गई है। करीब दो साल पहले तत्कालीन संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव के निर्देश पर मेपिंग की गई थी। ताकि कोलांस को उसके मूल स्वरुप में लाया जा सके, लेकिन उक्त प्लान कागजों में ही सिमटकर रह गई। बड़ा तालाब का संरक्षण नगर निगम करता है, लेकिन कोलांस नदी के संरक्षण को लेकर भोपाल व सीहोर जिलों को ठोस योजना बनाने की जरूरत है। कोलांस रेतीली नदी थी, किंतु नाले मिलने से रेत खत्म हो गई और कीचड़ भर गया है, जो बारिश के पानी के साथ तालाब में मिलता है। इसका नतीजा यह रहा कि तालाब में मिट्टी व गाद भर गई है, जिसे पर्यावरणविद् तालाब की सेहत के लिए ठीक नहीं मानते हैं।

40 फीसद हिस्सा बड़ा तालाब पर निर्भर

बड़ा तालाब न सिर्फ आसपास के इलाकों में भूजल स्तर को स्थित रखता है, बल्कि बैरागढ़, कोहेफिजा, ईदगाह हिल्स, शाहजहांनाबाद सहित पुराने शहर के बड़े हिस्से में पानी की आपूर्ति भी करता है, लेकिन अक्सर तालाब में सूखे के हालात बनते हैं और लाखों लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ता है। जानकारों का मानना है कि बड़ा तालाब पर शहर की 40 फीसद आबादी निर्भर है, जबकि तालाब कोलांस नदी पर आश्रित है। ऐसे में कोलांस के संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जाने बेहद जरूरी है।

वर्जन

- कोलांस नदी के जीर्णोंद्धार एवं गहरीकरण के लिए योजना तैयार करेंगे। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे।

केवीएस चौधरी कोलसानी, निगमायुक्त

Posted By: Lalit Katariya

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