भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय द्वारा प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों को चित्र प्रदर्शनी और चित्रों की बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रतिमाह लिखंदरा प्रदर्शनी दीर्घा में प्रदर्शनी सह विक्रय का संयोजन शलाका नाम से किया जाता है। इसी क्रम में रविवार से गोंड समुदाय की चित्रकार सरोज वेंकट श्याम के चित्रों की प्रदर्शनी का संयोजन किया जा रहा है। 32वीं शलाका चित्र प्रदर्शनी 30 दिसंबर तक रहेगी।

वर्ष 1978 में मध्यप्रदेश के पाटनगढ़ में जन्मी सरोज गोंड समुदाय की एक युवा चित्रकार हैं। घर-परिवार में सभी मजदूरी करने जाते थे और घर का परिवेश कलात्मक नहीं था। ऐसे में आस-पड़ोस की महिलाओं से सरोज ने बहुत कुछ सीखा। सरोज प्रकृति प्रेम के चलते अनेक बार सहेलियों के साथ जंगल की ओर निकल जाती थीं और बहुत सारा समय वहां व्यतीत करतीं। अनजाने में ही सही पर प्रकृति के विभिन्न रूप-रंगों को अपने आसपास के परिवेश को देखते हुए सरोज उन्हें अपनी स्मृतियों में सहेजती जातीं। उनके गांव के आसपास रहने वाले बैगाओं से वे खासी प्रभावित थीं। 1996 में सरोज का विवाह वेंकट रमण सिंह श्याम से हो गया। वेंकट स्थापित चित्रकार थे। सरोज चित्र बनाने में पति का थोड़ा बहुत सहयोग करने लगीं। पति भी उन्‍हें चित्रकारी के लिए प्रेरित करते। धीरे-धीरे सरोज की भी रुचि चित्रकर्म में होने लगी और स्वयं के लिए भी कुछ चित्र बनाने लगीं। सरोज अपने पति को ही अपना कला गुरु मानती हैं। 2003 में पहली बार सरोज पति के साथ दिल्ली के प्रगति मैदान में लगी प्रदर्शनी एवं चित्र शिविर में गईं और वहां उनका बनाया चित्र बिका। दिल्ली से आने के बाद सरोज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग 21 वर्षों की कला यात्रा में सरोज देश-विदेश में आयोजित अनेक चित्र शिविरों, कला कुंभ एवं चित्र प्रदर्शनियों में अपने चित्रों को प्रदर्शित कर चुकी हैं।

देश-विदेश में सराहा गया काम : वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की वर्जिनिया यूनिवर्सिटी में पति वेंकट श्याम के साथ एक विशाल म्यूरल चित्रित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सरोज द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में नर्मदा कला दीर्घा में बनाए भित्ति चित्र को एससीजेडसीसी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता में विशेष सांत्वना पुरस्कार एवं प्रशस्ति प्राप्त हुई। सरोज के चित्र लंदन, अमेरिका सहित अनेक देशों के निजी संग्रह में हैं। वे भोपाल में रहकर परिवार के साथ सतत चित्र कर्म में संलग्न हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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