भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम ने हाल ही में व्यवसायिक लाइसेंस शुल्क की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। अब मनमाने ढंग से इसकी वसूली भी की जा रही है। संपत्‍ति कर के साथ ही दुकानों की साइज के हिसाब से लाइसेंस शुल्क की मांग की जा रही है। जो दुकानें बंद पड़ी हैं, उन पर भी लाइसेंस शुल्क थोप दिया गया है।

नगर निगम ने इस वित्तीय वर्ष से नई दरें लागू की हैं। यह दरें इतनी अधिक हैं कि कई दुकानों पर संपत्ति कर से अधिक लाइसेंस शुल्क की मांग की जा रही है। पहले यह शुल्क 250 रूपये से एक हजार रूपये के बीच था। अब वर्गफुट के हिसाब से लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। गलियों एवं कालोनियों की दुकानों से चार रुपये प्रति वर्गफीट, मेन रोड की दुकानों से पांच रुपये प्रति वर्गफीट एवं 15 मीटर या इससे अधिक चौडी सड़क पर दुकान होने पर छह रुपये प्रति वर्गफीट शुल्क तय किया गया है। इसकी अधिकतम दर 50 हजार रूपये तक तय की गई है। बैरागढ़, लालघाटी एवं गांधीनगर में कई बड़ी दुकानें हैं। इन दुकानों का संपत्ति कर ही सालाना 10 हजार रुपये तक है लेकिन अब लाइसेंस शुल्क पांच गुना मांगा जा रहा है। इससे व्यापारियों में आक्रोश है।

बंद दुकानों पर भी लाइसेंस शुल्क लगाया

नगर निगम ने बंद पड़ी दुकानों पर भी लाइसेंस शुल्क लगा दिया है। बैरागढ़ में अनेक स्थानों पर दुकानें बद हैं। दुकान मालिक नियमानुसार इनका संपत्ति कर जमा करते हैं। हाल ही में कुछ संपत्ति मालिक संपत्ति कर जमा कराने गए तो उनसे कहा गया कि आपको लाइसेंस शुल्क भी जमा करना होगा। जब दुकान में कोई कारोबार नहीं हो रहा है तो लाइसेंस कौन से कारोबार का बनाया जाएगा, इसका जवाब कर्मचारी देने को तैयार नहीं हुए। पिछले दिनों बैरागढ़ के व्यापारियों ने लाइसेंस शुल्क पुरानी दर पर लेने का आग्रह आयुक्त से किया। था। जोनल अधिकारी विक्रम झा का कहना है कि जो दुकानें बंद हैं, उनका निरीक्षण कर शुल्क लाइसेंस शुल्क हटा दिया जाएगा। जहां कारोबार हो रहा है उनसे नई दरों के अनुसार ही लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा।

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