Bhopal News: (भोपाल, नवदुनिया) प्रतिनिधि। राजधानी के चंदनपुरा क्षेत्र में प्रस्तावित नया शहर वन अधर में है। प्रस्ताव बनकर तैयार है। तीन करोड़ 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है। इसे छह माह हो चुके हैं लेकिन विरोध के बाद काम चालू नहीं हो पाया है। विरोध क्षेत्र में बाघों के मूवमेंट को आधार बनाकर किया जा रहा है। जिसके बाद वन विभाग ने हाथ खींच लिए हैं। वहीं लहारपुर क्षेत्र के ईकोलॉजिकल पार्क का विस्तार भी अटक गया है। यह करीब 1700 एकड़ में फैला है। जिसमें से केवल 100 से 150 एकड़ क्षेत्र में ही वनों का घनत्व बढ़ा है। बाकी के हिस्सें में प्राकृतिक रूप से लगे पौधे व पेड़ हैं। ज्यादातर हिस्सा खाली है और कुछ जगह तो बिल्कुल मैदानी हिस्सा है। इस पूरे क्षेत्र को विकसित किया जाना है जो कि बजट के अभाव में काम अटक गया है। दोनों ही शहरवासियों के लिए जरूरी है।

चंदनपुरा में विरोध की वजह यह थी

चंदनपुरा के जिस रकबे पर शहरवन प्रस्तावित किया हैं वहां बाघों का मूवमेंट है। वन मामलों के जानकार राशिद नूर खान का कहना है कि शहर वन बनने के बाद आवाजाही बढ़ेगी। ऐसे में बाघों को नुकसान हो सकता है। लोगों की आवाजाही को देखकर बाघ अपना दायरा बदल सकते हैं। ऐसा हुआ तो वे जिन क्षेत्रों व जंगल में में जाएंगे वह उनके लिए नया होगा और वहां टकराव की स्थिति बढ़ेगी। यदि बाघ अपना क्षेत्र नहीं बदलेंगे तो चंदनपुरा में बाघ व इंसानों के बीच द्वंद की स्थिति बनने का खतरा हो सकता है। शहर वन बनने से स्थानीय निजी जमीन वाले व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ाएंगे। वन्यप्राणियों को इससे खतरा होगा।

ईकोलॉजिकल पार्क का विस्तार इसलिए अटका

दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण बजट नहीं मिल रहा है। भोपाल सामान्य वन मंडल के डीएफओ आलोक पाठक का कहना है कि बारिश के लिए प्रस्ताव बनाएंगे। इसमें समय बचा है जो पौधे लगाएं हैं उनकी देखरेख कर रहे हैं। तार—फेंसिंग से सीमाओं को कवर्ड करने की योजना है लेकिन उसके लिए भी बजट की जरूरत है।

Posted By: Lalit Katariya

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