भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। पिछले साल मार्च में कोरोना की दस्‍तक के बाद बंद की गई एक भी पैसेंजर ट्रेन को रेलवे ने अब तक बहाल नहीं किया है। इसके कारण मजदूर, किसान और निम्न आय वाले लोगों का गांवों व कस्बों से शहरों तक आना-जाना मुश्किल हो गया है। खासकर किसान, मजदूर वर्ग के लोग शहरों से कटे हुए हैं या फिर निजी बसों व साधनों से अधिक रुपये खर्च कर शहर पहुंच रहे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते मार्च 2020 में मेल, एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों को एक साथ बंद कर दिया था। इसमें से रेलवे ने मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों को तो बहाल कर दिया है, लेकिन भोपाल मंडल से गुजरने वाली 25 से अधिक पैसेंजर ट्रेनों को चालू नहीं किया है। ये वे ट्रेनें थी जो छोटे-छोटे स्टेशनों पर ठहराव लेकर चलती थीं। इनका किराया मामूली था, इनमें निम्न आय वर्ग के यात्री सफर करते थे। अप-डाउनरों के लिए ये ट्रेनें वरदान थीं, जिन्हें रेलवे चालू नहीं कर रहा है।

मेल-एक्सप्रेस चालू की, लेकिन छोटे स्टेशनों पर नहीं ठहरती

रेलवे ने कोरोना संक्रमण के दौरान बंद की मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों को तो चालू कर दिया है, लेकिन इनमें से एक भी ट्रेन निशातपुरा, मंडीदीप, मिसरोद, औबेदुल्लागंज, पवारखेड़ा, बरखेड़ा, बुधनी, सूखीसेवनिया जैसे स्टेशनों पर नहीं ठहरती हैं। ये ऐसे स्टेशन हैं जहां से रोजाना दर्जनों लोग शहरों के तक आना-जाना करते थे। इनका नुकसान हो गया है।

अप-डाउनर्स पर ज्यादा मार

पैसेंजर ट्रेनों में किराया कम होता था। ये प्रत्येक छोटे स्टेशन पर ठहराव लेकर चलती थीं। इसलिए इनमें अप-डाउनर बड़ी संख्या में सफर करते थे। ये गरीबों की ट्रेनें कहलाती थीं, क्योंकि किराया सबसे कम लगता था। अप-डाउनर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अरुण अवस्थी का कहना है कि रेलवे के अधिकारियों को सभी समस्याएं बार-बार बता चुके हैं। कोई सुनवाई करने के लिए तैयार ही नहीं है। पैसेंजर जैसी ट्रेनों को बंद करके रखा है।

इन मार्गों पर चलती थी पैसेंजर ट्रेनें

भोपाल से उज्जैन, इंदौर, दिल्ली, नागपुर, इटारसी, भुसावल, पिपरिया के लिए पैसेंजर ट्रेनें मिलती थीं। कोरोना के पहले तक इनकी संख्या 25 से अधिक थी। ये भोपाल मंडल के संबंधित स्टेशनों से होकर गुजरती थीं।

रेलवे का तर्क

रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि पैसेंजर ट्रेनों की जगह मेमू ट्रेनें चलाईं जाएंगी। ये ट्रेनें अधिक गति से चलेंगी, जो छोटे-छोटे स्टेशनों पर कम समय में ठहरेंगी और जल्द गति पकड़ लेंगी। इन्हें मंडल के एक से दूसरे स्टेशनों के बीच चलाया जाएगा। एक मंडल से दूसरे मंडल के बीच भी ये ट्रेन चलाई जा सकती है। आम यात्रियों का कहना है कि मेमू ट्रेन से काम नहीं चलने वाला है, क्योंकि ये कम दूरी के लिए होंगी। जबकि पैसेंजर ट्रेनें लंबी दूरी तक चलती थीं।

Posted By: Ravindra Soni

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