भोपाल। डेढ़ साल का संतोष जिस खिलौने से खेलकर खिलखिला उठता था। उसी ने उसकी जिंदगी छीन ली। खिलौने में लगी बैटरी को वह खाने की चीज समझकर निगल गया। बैटरी आहार नली में कुछ दिन तक फंसी रही। बैटरी का एसिड निकलने से आहार नली फट गई और तीन दिन तक वह जिंदगी मौत से जूझता रहा है। आखिरकार जिंदगी हार गई। हमीदिया अस्पताल में पिछले दिनों उसकी मौत हो गई। संतोष तो अब दुनिया में नहीं रहा, लेकिन सभी माता-पिता को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है।

बच्चे के पिता प्रेम सिंह बैरसिया के रहने वाले हैं। वह बच्चे को लेकर कुछ दिनों पहले हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने बच्चे को इमरजेंसी में दिखाया। उन्होंने बताया कि बच्चे ने खिलौने में लगी चने के दाने के आकार की बैटी निगल ली है। यहां से उसे नाक, कान एवं गला विभाग में रेफर कर दिया गया।

विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यशवीर जेके ने एंडोस्कोपी की मदद से बैटरी निकाली। डॉ. यशवीर ने बताया कि आहार नली में बैटरी करीब 50 ग्राम गीली मिट्टी की तरह हो गई थी। रंग भी मिट्टी की तरह ही था। डॉ.यशवीर के मुताबिक परिजन ने बताया था कि अस्पताल आने के कई दिन पहले बच्चा बैटरी निगल गया था।

परिजन इस इंतजार में थे कि अन्य ठोस चीजों की तरह बैटरी शौच के दौरान निकल जाएगी। जब हालात खराब होने लगी तो उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। यहां बैटरी निकालने के बाद बच्चे को शिशु रोग विभाग में भर्ती करने को कहा गया, लेकिन परिजन दो दिन बाद भर्ती कराने के लिए लेकर आए। यहां बच्चे का इलाज शुरू किया गया। अगले दिन उसकी हालत और खराब हो गई। बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

शिशु रोग विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि एसिड से आहार नली फटने की वजह से खाने-पीने की चीजें मीडियास्टिनम (हार्ट और फेफड़े के बीच का हिस्सा) में जा रही थीं। इस वजह से उस हिस्से में संक्रमण हो गया। संक्रमण के चलते इस जगह पर पानी और मवाद भर गया, जिससे वह हिस्सा खराब हो गया। संक्रमण के चलते उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। काफी मशक्कत के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।

इतनी खतरनाक है खिलौने की बैटरी

डॉ. यशवीर ने बताया कि किसी भी बैटरी में एसिड होता है। बॉडी फ्लूड के संपर्क में आते बैटरी के प्लस और माइनस सक्रिय हो जाते हैं। इस कारण बैटरी जल्दी घुलने लगती है। जहां पर बैटरी होती है शरीर का वह हिस्सा जल जाता है। उन्होेंने कहा कि कोई भी छोटी चीज बच्चों की पहुंच में नहीं रखनी चाहिए, जिसे वह निगल सकते हैं। उनके मुताबिक हमीदिया अस्पताल में हर हफ्ते तीन से चार केस सिक्के निगलने के आ रहे हैं। इन्हें एंडोस्कोपी से निकाला जा रहा है।

यह चीजें न दें बच्चों को

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि चना, मूंगफली, आलपिन, सुपारी, खिलौने की बैटरी, सिक्के छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए। इन चीजों के सांस नली में फंसने से बच्चे की जान जा सकती है।

बच्चा बैटरी निगले तो तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं

- बैटरी आहार नली की दीवार में छेद कर सकती है, इसलिए तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं।

- बैटरी के शौच में निकलने का इंतजार न करें।

- ऐसे अस्पताल में जाएं, जहां तत्काल एंडोस्कोपी कराई जा सके।