Bhopal News :भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। रेल यातायात का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। इसलिए आज भी मानव तस्करी के लिए तस्कर ट्रेनों का सर्वाधिक उपयोग करते है। यह बात रेल कोच फैक्ट्री निशातपुरा में मानव तस्करी के विरुद्ध आयोजित आपरेशन आहट नामक एक दिवसीय कार्यक्रम बचपन बचाओ आंदोलन के मप्र के समन्वयक सलमान मंसूरी और परियोजना समन्वयक मधुमिता सेनगुप्ता द्वारा बताई गई। इस दौरान आरपीएफ के जवानों पॉक्सो एक्ट एवं जेजे एक्ट की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का आयोजन आरपीएफ भोपाल द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त बी.राम कृष्णा, सहायक सुरक्षा आयुक्त अशोक कुमार, रेल सुरक्षा बल निरीक्षक, उपनिरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक एवं आरक्षक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

तस्करों को रोकने चलाया जा रहा आपरेशन आहट :

भोपाल मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त बीराम कृष्णा ने बताया कि आरपीएफ ने देशभर में 750 एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) की स्थापना की है। इन एएचटीयू का काम पुलिस, थानों की एएचटीयू, खुफिया एजेंसियों, मानव तस्करी को रोकने काम कर रहे एनजीओ के साथ समन्वय कर ट्रेनों के जरिए होने वाली मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करना है। इन्हीं एएचटीयू के जरिए आरपीएफ ने मानव तस्करी को रोकने ऑपरेशन आहट (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) नामक अभियान शुरू किया है। आरपीएफ की पकड़ पूरे देश में होने के कारण मानव तस्करी रोकने बलों की भूमिका प्रमुख है। इस कारण आरपीएफ लगातार ऐसे तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई करने में जुटा है।

जबरदस्ती करवाए जाते हैं अनैतिक काम :

पीड़ितों को ट्रेनों के जरिए उनके मूल स्थान से उठाकर अन्य जगहों तक ले जाया जाता है और उन्हें जबरदस्ती यौन शोषण, देहव्यापार, मजदूरी, जबरन शादी, घरेलू कामकाज, गोद देना और भीख मंगवाना जैसे काम करवाए जाते हैं। कई बार तस्कर मासूम लोगों के अंगों का प्रत्यारोपण तक करवा देते हैं और मादक पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान भिजवाने के लिए भी इन्हीं लोगों का उपयोग किया जाता है और इनमें सबसे ज्यादा पीड़ित महिलाए और बच्चे होते हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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