Bhopal News:भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। कोलार जल प्रदाय की 40 साल पुरानी सीमेंट-कांक्रीट की पाइप लाइन जर्जर होने की वजह से इसमें बार-बार लीकेज हो रहा था। इसलिए शासन ने अमृत योजना के तहत 136 करोड़ रुपये खर्च कर लोहे की पाइप लाइन बदली गई है। लेकिन गुणवत्तापूर्ण काम नहीं होने से लोगों को पाइप लाइन के लीकेज से निजात नहीं मिल रहा है। आएदिन पाइप लाइन में लीकेज की वजह से लाखों गैलन पानी की बर्बादी हो रही है। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

बतादें कि काेलार जलप्रदाय योजना के तहत 20 किलोमीटर की नई ग्रेविटी और 60 किलोमीटर फीडर पाइप लाइन बिछाने का काम टाटा कंपनी को दिया गया था। लेकिन कुशल कर्मचारियों की कमी और अधिकारियों की लापरवाही से गुणवत्तापूर्ण काम नहीं हुआ। नतीजन बीते दाे महीने शुरु हुई पाइप लाइन में आधा दर्जन बार पाइप लाइन में बड़े लीकेज हो चुके हैं। इसकी वजह से जलप्रदाय भी कई दिनों तक प्रभावित रहा है। इस आश्रित दस लाख से अधिक आबादी को पानी के लिए परेशान होना पड़ा है। पाइप लाइन में लीकेज की वजह से लोगों के घरों में आने वाले नलजल कम दबाव से आता है। इससे रहवासियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है।

इन कारणों से पाइप लाइन में हो रहा लीकेज

राजधानी में पानी की पाइप लाइन के साथ सीवेज, रसोई गैस और बिजली की अंडर ग्राउंड केबल करने का काम किया जा रहा है। इससे अलग-अलग निर्माण एजेंसियां सड़कों की खोदाई कर रही हैं। इससे पानी की पाइप लाइन फूट जाती है। अभी हाल में ही थिंक गैस कंपनी द्वारा पाइप लाइन डालने के लिए की जा रही खोदाई की वजह से बावड़िया ओवर ब्रिज के पास नर्मदा पाइप फूट गई थी। इससे करीब पंद्रह दिन तक पानी लाखों गैलन पानी बहता रहा। वहीं कालोर की नई पाइप लाइन में लीकेज होने का दूसरा कारण पाइप लाइन के जोड़ में अच्छे से बिल्डिंग कर जोड़ाई नहीं करना है। चार दिन पहले फारेस्ट कालोनी और एक माह पहले बैरसिया रोड में पाइप लाइन के जोड़ खुल गए थे। जिससे पानी के बर्बादी के साथ दो दिनों तक दस लाख रहवासियों को पानी नहीं मिला।

पांच साल में ही नर्मदा पाइप लाइन हो गई जर्जर

नर्मदा पाइप लाइन को शुरु हुए अभी पांच साल हुए हैं। लेकिन इतने कम समय में ही इस पाइप लाइन में एक दर्जन से अधिक लीकेज हैं। इनसे प्रतिदिन लाखों गैलन पानी सड़कों और नालों में बह रहा है। लेकिन रहवासियों की शिकायत के बाद भी निगम के जलकार्य शाखा के इंजीनियर मरम्मत करने में लापरवाही दिखा रहे हैं।

यहां है पाइप लाइन में लीकेज

राजधानी में नर्मदा, कोलार, केरवा और बड़े तालाब के पानी की आपूर्ति की जाती है। इनमें कोलार पाइप लाइन के मेंटेंनेंस का जिम्मा टाटा कंपनी का है, जबकि अन्य नाइनों की जिम्मेदारी नगर निगम के अधिकारियों के पास है। इसके बावजूद पाइपलाइनों में लीकेज की मरम्मत नहीं की जा रही है। इसकी वजह से अरेरा हिल्स, बोगदा पुल, होशंगाबाद रोड, वीआइपी रोड, करोंद, पालीटेक्निक चौराहा, राजभवन, सिक्योरिटी लाइन समेत दो दर्जन से अधिक पाइप लाइनों में लीकेज है।

इनका कहना

निर्माण एजेंसियों की खोदाई से पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होती है, जिसससे इसमें लीकेज की समस्या आती है। इसके अलावा बरसात की वजह से मिट्टी धंस जाती है, पाइप लाइन में दबाव पड़ने से इसके रिंग का एलयामेंट बिगड़ता है और पाइप लाइन में लीकेज होता है। इसके लिए अब इन स्थानों पर पाइप लाइन के ऊपर कांक्रीटीकरण किया जा रहा है।

-उदित गर्ग, मुख्य अभियंता जलकार्य विभाग नगर निगम

कोलार से जलापूर्ति - 94 एमसीएम

केरवा से जलापूर्ति - 60 एमसीएम

बड़े तालाब से जलापूर्ति - 20 एमसीएम प्रतिदिन

नर्मदा से जलापूर्ति - 185 एमएलडी प्रतिदिन

चारों परियोजनाओं के तहत बिछाई गई पाइप लाइन - 600 किलोमीटर

राजधानी के कुल घरों में नल कनेक्शन - चार लाख से अधिक

Posted By: Lalit Katariya

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close