भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में शुक्रवार को दो मामलों में समझौता कराया गया। पहला मामला दुकान विक्रय के बाद पूरी राशि नहीं देने का था। वहीं दूसरा मामला एक दंपती का पुहंचा था। प्राधिकरण में दो पक्षों के बीच दुकान विक्रय को लेकर एक आवेदक ने शिकायत की थी कि उसने दुकान जिसे बेची थी, उसने पूर राशि नहीं लौटाई। पहले मामले में छह साल पुराने दुकान विक्रय संबंधी विवाद में समझौता कराया गया। प्राधिकरण सचिव संदीप शर्मा के समझाने के बाद अनावेदक विक्रेता को बाकी बची साढ़े 11 लाख रुपये की राशि तीन किश्तों में देने को तैयार हुआ।

दरअसल, अवधपुरी निवासी आवेदक ने प्राधिकरण में आवेदन देकर बताया था कि उसने छह साल पहले अपनी दो दुकानों का सौदा अयोध्या बायपास निवासी दंपती से किया था। उस वक्त 12 लाख रुपये में दुकानें विक्रय की गई थी। आवेदक ने बताया कि दंपती ने दुकान खरीदी एग्रीमेंट के समय एक लाख रुपये दिए थे। उसके बाद से अब तक एक भी पैसा अदा नहीं किया गया। इस कारण उसने पैसा दिलवाने की गुहार लगाई थी। मामले में अनावेदक ने माना कि वह आवेदक को साढ़े 11 लाख रुपये की राशि देने को तैयार हैं। यह राशि अनावेदक तय किस्तों में हर माह की दस तारीख के पहले देगा।

पत्नी को 5 लाख स्र्पये, बेटी का उठाएगा जिम्मेदारी

एक दंपती का मामला प्राधिकरण में पहुंचा। पत्नी ने अपना हक दिलवाने की गुहार लगाई। मामले में समझौता कराया गया। इसके तहत अब पति, बेटी और पत्नी के लिए भरण-पोषण के रूप में एकमुश्त पांच लाख रुपये की राशि देगा। साथ ही बेटी की सभी जिम्मेदारी भी निभाएगा। प्राधिकरण में पत्नी ने बताया कि उसकी शादी 2008 में हुई है और 11 साल की बेटी भी है। शादी के कुछ ही दिनों बाद उसका पति से विवाद शुरू हो गया था। पत्नी ने बताया कि पति के व्यवहार से परेशान होकर उसने केस दर्ज कराया था। इसके बाद न्यायालय की तरफ से बेटी के भरण-पोषण की खातिर हर माह 1500 रुपये देने के आदेश पति के लिए जारी हुए थे। पत्नी ने कहा कि पति अब यह भरण-पोषण महीनों से नहीं दे रहे, जिसके चलते मां-बेटी आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं। मामले में पति किसी कीमत पर पत्नी को साथ रखने तैयार नहीं है। पति को समझाने के बाद भरण-पोषण के रूप में पांच लाख रुपये एकमुश्त देने के लिए है। साथ ही वह आवेदिका को उसके सारे गहने भी वापस करेगा। वह पत्नी को ढ़ाई लाख की एफडी भी सौंपेगा, जिसकी नॉमिनी बेटी होगी।

Posted By: Lalit Katariya

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