भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। शहर के प्रमुख सरकारी अस्तालों में भी अग्नि सुरक्षा को लेकर लापरवाही देखने को मिल रही है। नगर निगम के फायर अधिकारियों की जांच में सामने आया है कि सुल्तानिया अस्पताल की सिर्फ प्रोवीजनल फायर एनओसी है, जो सिर्फ छह महीने के लिए होती है। सुल्तानिया, जेपी और हमीदिया अस्पताल में आग बुझाने के लिए वाटर हाइड्रेंट सिस्टम ही नहीं है। इसके जरिए पानी के फव्वारे से आग बुझाई जाती है। इससे बड़ी लापरवाही क्या हो सकती है कि महिलाओं के सबसे बड़े अस्पातल सुल्तानिया अस्‍पताल के पास की टेंपरेरी एनओसी तक नहीं है। आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की वजह से सुल्तानिया अस्पताल को नगर निगम की तरफ से छह महीने की प्रोवीजनल फायर एनओसी ही दी गई है। वह भी करीब दो महीने में खत्म होने वाली है।

पिछले साल नवंबर में कमला नेहरू अस्पताल स्थित हमीदिया की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में शार्ट सर्किट से आग लगने की वजह से चार नवजातों की मौत हो गई थी। उस दौरान खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के सभी निजी और सरकारी अस्पताल की फायर आडिट कराने को कहा था। इसके बाद भी राजधानी के प्रमुख शासकीय अस्पतालों का ही यह हाल है।

हाल ही में जबलपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने के बाद 10 मरीज झुलसकर मर गए थे। इसके बाद भोपाल नगर निगम के फायर अमले ने शहर के सभी अस्पतालों की जांच शुरू की है, जिसमें सरकारी और निजी अस्पतालों की कमियां और लापरवाही सामने आ रही है। इंदिरा गांधी गैस राहत अस्पताल के भूतल के साथ ही छह मंजिला भवन में वाटर हाइड्रेंट सिस्टम तो लगा है, लेकिन काम नहीं कर रहा है।

निजी और सरकारी अस्पतालों में इस तरह की कमियां

--- वाटर हाइड्रेंट के लिए पर्याप्त पानी टैंकों में नहीं है।

--- अस्पतालों में अग्निशामक उपकरण चलाने के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग नहीं दी गई है।

--- 90 प्रतिशत से ज्यादा अस्पतालों में फायरमैन नहीं हैं।

--- आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं शार्ट सर्किट से होती हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक आडिट नहीं कराया जा रहा है।

Posted By: Ravindra Soni

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