भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज सनातन संस्कृति के संवाहक थे। बाहरी आंखों से वे नहीं देख पाते थे लेकिन अंदर की आंखों से वे सीधे ईश्वर से जुड़े थे। उन्होंने आध्यात्मिक अलग जलाकर देश में सनातन संस्कृति को बढ़ावा दिया।

सद्गुरु स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज का 116 वॉ अवतरण दिवस आज संत हिरदाराम नगर में श्रद्धा के साथ मनाया गया। सिंधु नव जागरण समिति, स्वामी शांति प्रकाश धर्मशाला ट्रस्ट, झूलण कल्याण मडंलम सेवा समिति व सिंधु जागृति सेवा समिति के संयुक्‍त तत्वावधान में झूलेलाल मंदिर स्थित साईं जी की भव्य प्रतिमा के समक्ष समारोह मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव मधु चांदवानी ने संत जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। चांदवानी ने कहा कि बचपन से ही स्वामी शांति प्रकाश जी का झुकाव अध्यात्म की तरफ था। स्वामी शांति प्रकाश जी ने अध्यात्म की अलख जगाई।

भजन कीर्तन के बाद केक काटा

इस अवसर पर भजन कीर्तन का कार्यक्रम हुआ। केक काट गया। भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माधु चांदवानी, सिन्धु नव जागरण समिति के अध्यक्ष रामकुमार पारदासानी, मंदिर अध्यक्ष राजकुमार वाधवानी, पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष साबू रीझवानी, पार्षद अशोक मारन, भाजपा नेता चंद्रप्रकाश इसरानी, कांग्रेस नेता घनश्याम लालवानी, आसनदास वाधवानी, नंदकुमार दादलानी, मोहन मीरचंदानी, मुरली गुरबाणी ,कमलेश छुगानी, मूलचंद रामचंदानी,भरत पारदासानी, रमेश रामचंदानी, हीरो आडवानी,कमलेश तोलानी सहित सैकड़ो धर्म प्रेमी बंधु उपस्थित थे। चांदवानी ने बताया कि स्वामी शांति प्रकाश महाराज का मुख्य आश्रम उल्हासनगर में है। स्वामी शांति प्रकाश जी के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी देव प्रकाश जी ने उनके कार्यों को आगे बढ़ाया है। स्वामी देव प्रकाश जी के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से बैरागढ़ में स्वामी शांति प्रकाश धर्मशाला का निर्माण भी किया गया है।

Posted By: Ravindra Soni

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close