Bhopal News :भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। शहर के 11 मील सहारा स्टेट कालोनी में रहने वाली समाजसेविका व श्वान प्रेमी नीति खरे के घर में श्वानों का बसेरा है। विशेष बात है यह कि नीति खरे ऐसे श्वानों को अपने घर में रखती हैं, जो सड़क हादसों में घायल हो जाते हैं। किसी श्वान का पैर टूट जाता है तो किसी की आंखें चली जाती हैं। अब तक नीति खरे 50 से अधिक श्वानों की जान बचा चुकी हैं, जो सड़क हादसों में घायल हुए थे। अभी उनके घर में छह घायल श्वान हैं, जिनका इलाज व खाने की व्यवस्था स्वयं अपने खर्चों पर कर रही हैं। एक निजी स्कूल की प्राचार्य की नौकरी छोड़ने के बाद अब पूरी तरह से श्वानों की मदद करने में जुट गई हैं। हर महीने अपनी जमापूंजी में से 10 से 15 हजार रुपये खर्च करके श्वानों के भोजन सहित उनका पालन-पोषण कर रही हैं। उनके इस काम में पति शैलेष सहित परिवार के सभी सदस्य सहयोग करते हैं। अब नीति खरे की पहचान श्वानों की रक्षा करने वाली दीदी के नाम से बन गई है। बच्चे उन्हें दीदी कहकर बुलाते हैं। वे बच्चों को श्वानों के व्यवहार के बारे में बताती हैं। इससे बच्चे श्वानों को छेड़े नहीं, जिससे श्वानों द्वारा बच्चों को काटने की घटनाएं न हों।

तीन बूढ़े, एक की आंखें नहीं

अभी नीति खरे अपने घर में छह श्वानों को रखे हुए हैं। इनमें से तीन बूढ़े हो चुके हैं। ये तीनों नर्मदापुरम रोड पर वाहनों की टक्कर से घायल हो गए थे। दो के पैर टूट गए थे, तो एक के मुंह पर चोट आई थी। तीनों का अपने खर्चे पर इलाज कराया। अब तीनों बुजुर्ग श्वान स्वस्थ हैं। वहीं एक श्वान की एक हादसे में आखें चली गई थीं, जिसकी देखरेख व इलाज अभी चल रहा है।

गोद ले जाते हैं श्वान

समाजसेविका व श्वान प्रेमी अब घर में घायल श्वानों की देखरेख करती हैं। उन्हें भोजन कराती हैं। ठीक होने के बाद निश्शुल्क श्वान प्रेमियों को दे देती हैं। लोग श्वानों को गोद लेने आते हैं। अब तक 50 सड़क हादसों में घायल हुए श्वानों को ठीक करके गोद दे चुकी हैं। 2003 से निरंतर घायल श्वानों को ठीक कराने का काम कर रही हैं।

कई श्वानों की कराई नसबंदी

शहर में बेसहारा श्वानों की संख्या अधिक न बढ़े। जिससे उनकी सड़क हादसों में मौतें हों, ऐसे में नीति खरे श्वानों की नसबंदी कराने का काम भी करती हैं। बीते 19 वर्षों में कई श्वानों की नसबंदी करा चुकी हैं। अब इनके सराहनीय कार्य को नगर निगम प्रशासन भी मानने लगा है। कई बार रेस्क्यू में नगर निगम प्रशासन व वन विभाग उनकी मदद लेता है।

Posted By: Lalit Katariya

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