Bhopal News: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सरकारी स्कूलों में प्रवेश की संख्या बढ़ाने के लिए बच्चाें काे निश्शुल्क भोजन दिया जाता है। पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जाता है, लेकिन बच्चे घर से टिफिन ला रहे हैं। उन्हें मध्यान्ह भोजन पसंद नहीं आ रहा है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी का कहना है कि स्कूलों में मध्यान्ह भोजन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं होता है। मध्यान्ह भोजन उनके नियंत्रण में नहीं है। यह जिला पंचायत की जिम्मेदारी है। वहीं जिला पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि बजट और भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी हमारी है, लेकिन गुणवत्ता की निगरानी स्कूल शिक्षा विभाग की है कि वे स्कूलों से कराएं।ऐसे में बच्चों को बेस्वाद खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है

शाला प्रभारी को खाना टेस्ट करना होता है

मध्यान्ह भोजन में शाला प्रभारी की जिम्मेदारी यह रहती है कि वह यह देखे की खाने का स्वाद अच्छा है या नहीं। अगर उन्हें लगता है कि खाना खाने लायक है तो उसे वितरण किया जाता है, नहीं तो इंकार कर सकते हैं।

मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी इन पर

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियाें का कहना है कि मध्यान्ह भोजन पर उनका सीधा कोई नियंत्रण नहीं होता है, बल्कि वे सिर्फ खाने का स्वाद ले सकते हैं।मध्यान्ह भोजन जनपद पंचयात द्वारा ग्रामीण विकास विभाग की ओर से दिया जाता है। इसके लिए स्व सहायता समूहों को पंजीयन कराना होता है। उनका अनुबंध होता है। इसी के आधार पर उन्हें स्कूल में मध्यान्ह भोजन का काम दिया जाता है। जनपद को ही समूह की जांच से लेकर उसकी निगरानी करना होता है।

स्कूलों में भोजन बच्चे ही परोसते हैं

स्कूलों में मध्यान्ह भोजन परोसने के सेविकाएं उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि कई स्कूलों में बच्चे खुद ही खाना परोसते हैं और खुद ही थाली भी धोते हैं।

वर्जन

मध्यान्ह भोजन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता है।मप्र में मध्यान्ह भोजन का काम ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत मध्यान्ह भोजन परिषद करते हैं।जिला पंचायतों के माध्यम से मध्यान्ह भोजन का कार्य जिलों में दिया जाता है।स्कूल में भोजन आने के बाद बच्चों को वितरण से पहले उसकी निगरानी शाला प्रभारी की जिम्मेदारी होती है।

- धनराजू एस, संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र

-ग्रामीण क्षेत्रों में स्व सहायता समूहों के माध्यम से भोजन तैयार होता है। शहरी क्षेत्रों में एक ही रसोईघर से भोजन भेजा जाता है। इसका बराबर निरीक्षण किया जाता है।गुणवतापूर्ण भोजन की निगरानी स्कूलों की जिम्मेदारी होती है।

ऋतुराज सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत

Posted By: Lalit Katariya

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