भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र सरकार के आम बजट से सभी वर्गों को काफी उम्मीदें हैं। इनमें खिलौना कारोबारी भी शामिल हैं। वे चाहते हैं कि स्थानीय स्तर पर खिलौना बनाने वालों के लिए सरकार अच्छी योजना लाए। इसके लिए उद्योग भी स्थापित हो। पारंपारिक खिलौना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा जीएसटी की दरें कम हो या फिर पूरी तरह खत्म हो जाए। भोपाल समेत मध्य प्रदेश में नए खिलौना उद्योग स्थापित किए जाए। इसके लिए कम ब्याज दरों पर लोन एवं सब्सिडी दी जाए। इससे नए खिलौना उद्योग स्थापित करने में उद्यमियों को मदद मिलेगी। साथ ही रियायत दर पर बिजली व जमीन भी दी जाए। बजट में सरकार खिलौना उद्योग को लेकर भी प्रविधान करें।

ये चाहते हैं खिलौना व्यापारी

- इलेक्ट्रानिक खिलौने पर 18 एवं सादे खिलौने पर लगने वाला 12 प्रतिशत जीएसटी कम हो या फिर खत्म किया जाए।

- देश में खिलौना उद्योग को सरकार प्रोत्साहित करें। भोपाल समेत मध्य प्रदेश में नया उद्योग हो।

- पारंपारिक खिलौना उद्योग को बढ़ावा मिलें।

- उद्यमी एवं कारीगरों को आर्थिक रूप से मदद दें।

- विदेशी खिलौने मंगाने पर नियमों में छूट दी जाए। वर्तमान में टैक्स अधिक लिया जाता है।

ये कहते हैं व्यापारी-

- केंद्र सरकार के आम बजट में खिलौना उद्योग को विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए। साथ ही मध्य प्रदेश में नए उद्योग स्थापित हो। जिसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में रियायती दर पर बिजली व जमीन भी दी जाए। ताकि उद्योग स्थापित करने में आसानी हो। जीएसटी कम किया जाए या फिर खत्म हो। जिससे व्यवसायियों को राहत मिलेगी।

नरेश चेलानी, खिलौना व्यवसायी

- कई वर्षों से पारंपारिक खिलौना बना रहे हैं। कोरोना काल में व्यवसाय खासा प्रभावित रहा। वर्तमान में भी स्थिति ठीक नहीं है। बजट के माध्यम से सरकार पारंपारिक खिलौना उद्योग को बढ़ावा दें। उद्यमी या कारीगरों की आर्थिक रूप से मदद भी की जाए।

मोहम्मद शकील, पारंपारिक खिलौना कारीगर

- विदेश से आने वाले खिलौनों पर नियमों में छूट दी जाए। ऐसे में खिलौने सस्ते हो जाएंगे और लोगों को भी कम दाम पर मिलेंगे। इसके अलावा उद्योग स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जाए। बजट में खिलौना उद्योग के लिए बहुत कुछ होने की उम्मीद है।

प्रभाकर गुप्ता, खिलौना व्यवसायी

- खिलौनों पर जीएसटी बहुत अधिक है। सरकार इसे कम करें। ताकि ग्राहकों को कम कीमत पर खिलौना मिल सके। विदेशों से खिलौना मंगाते हैं तो उस पर भी कई तरह के टैक्स लगते हैं। इससे वह महंगा हो जाता है। सरकार इसमें राहत दें। स्थानीय उद्यमियों को खिलौना निर्माण के लिए प्रेरित करें और सुविधाएं दी जाए।

इंदर अमरनानी, खिलौना व्यवसायी

Posted By: Lalit Katariya

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