भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। मैनिट परिसर के अंदर मंगलवार रात आठ बजे तक 12 घंटे चली खोजबीन के बावजूद बाघ नहीं मिला है, लेकिन पकड़ने के लिए एक पिंजरा लगा दिया है। उसके अंदर बकरे को बांध दिया है। तीन ट्रैप कैमरे भी लगाए हैं। मैनिट प्रबंधन द्वारा जगह-जगह लगाए सीसीटीवी कैमरे की भी मदद ली जा रही है। यहां सोमवार रात को बाघ दिखने की सूचना मिली थी। जिसके बाद छात्रों में हड़कंप मचा है। प्रबंधन भी चिंतित है। इस बीच कक्षाएं भी निरस्त करने की सूचना आई थी, जो फर्जी निकली है।

बता दें कि सोमवार देर रात को परिसर में रहने वाले कुछ कर्मचारियों ने शहर से घर लौटते समय एक बड़े वन्यप्राणी को देखने का दावा किया था। इसी बीच एक बछड़ा भी जख्मी मिला था। तभी से परिसर के अंदर बाघ के दाखिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बाद वन अमले ने रात नौ बजे से रात 12 बजे तक गश्त की थी लेकिन कुछ नहीं मिला था। मंगलवार सुबह आठ बजे से 12 बजे तक चार घंटे ओर दोपहर तीन बजे से रात आठ बजे तक पांच घंटे पुन: खोजबीन की थी लेकिन अमले को बाघ की मौजूदगी नहीं मिली है। इसकी पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने कर दी है।

परिसर में मौजूद है कोई वन्यप्राणी

परिसर में कोई बड़ा वन्यप्राणी मौजूद है, ऐसा इसलिए क्योंकि एक बछड़े को जख्मी किया है। यह हमला सोमवार रात में हुआ है। हालांकि बछड़े पर पंजे के निशान स्पष्ट नहीं है। यदि परिसर में बाघ की मौजूदगी मिलती है तो यह पहली घटना होगी। हालांकि आइआइएफएम में चार बार तेंदुआ घुस चुका है, ये घटनाएं बीते चार वर्ष में हुई हैं। यह क्षेत्र मैनिट से लगा हुआ है।

खोजबीन में जुटे अमले को वन्यप्राणियों के पगमार्क मिले हैं, लेकिन वह बाघ के ही है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो रही है।

बाघ की मौजूदगी से इंकार नहीं

भोपाल के आसपास बाघ दिखाई देते रहे हैं। हाल ही में एक बाघ वाल्मी पहाड़ी में दाखिल हुआ था, जो तीन दिन बाद निकला था। इस बाघ की पहचान टी-1233 के रूप में हुई थी।

टूटी है बाउंड्रीवाल

मैनिट परिसर चारों ओर बाउंड्रीवाल व तार फेंसिंग से कवर्ड है, लेकिन यह कई जगह से टूटी है। बाघ की खोजबीन करने पहुंचे वन अमले को खुशीलाल अस्पताल की ओर जगह-जगह बाउंड्रीवाल टूटी मिली है। इसकी सूचना प्रबंधन को दे दी गई है।

मैनिट के अंदर बाघ की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले हैं। तब भी अमले को सतर्क कर दिया है। पिंजरा व ट्रैप कैमरे लगाकर निगरानी कर रहे हैं।

- आलोक पाठक, डीएफओ, भोपाल सामान्य वन मंडल

Posted By: Ravindra Soni

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