भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भेल के पीजी डिप्लोमा इन टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों के लिए विदिशा, रायसेन और भोपाल के पर्यटन स्थलों का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। इसमें पुरातत्वेत्ता डा पूजा सक्सेना के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को एतिहासिक स्थलों की जीवंतता का आभास कराया गया। प्रख्यात इतिहासकार और पुरातत्वेत्ता डा. पूजा सक्सेना ने विद्यार्थियों का उनके शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि मप्र में पर्यटन विभाग विभाग में अपार संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को मप्र के एतिहासिक धरोहरों से परिचित होना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने बताया उदयगिरी की गुफा नं-5 के शिलाचित्र वराह अवतार के मुख पर प्रतिवर्ष 21 जून को सूरज की पहली किरण पड़ती है। इसे इवेंट के रुप मे प्रचारित कर रोजगार के अवसर निर्मित किए जा सकते हैं। इसी चित्र में तीनो लोक का वर्णन है, पृथ्वी व ब्रह्मा जी के मुख पर और समुद्र देव ब्रह्मा जी की स्तुति करते दिखते हैं, विभिन्न नदियां समुद्र में समाहित होते हुए भी दिखती हैं। समीप की गुफा नं-6 के द्वार पर भगवान गणेश की प्रारंभिक प्रतिमा है। वर्तमान मे प्रचलित प्रतिमाएं इसी प्रतिमा का विकसित स्वरूप हैं। प्रतिवर्ष 21 जून को सूरज की पहली किरण, उदयगिरी की गुफा में बने वराह अवतार के शिला चित्र के मुख पर पड़ती है।

उन्‍होंने बताया कि भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर इसका प्रचार करने के उद्देश्य से यूनानी दार्शनिक होलीओदर का स्तंभ, गरूड़ ध्वज के साथ, उदयगिरी के निकट खांमबाबा नामक पर्यटन स्थल पर है। उन्होंने बताया कि विश्व प्रसिद्ध सांची के स्तूपों के द्वारों पर भगवान बुद्ध के जीवनकाल की द्रृश्यावली इस तरह उकेरी गई है कि मानो यह उस युग की फेसबुक हो, हाथी के दांतो पर नक्काशी करने वालों ने पत्थर पर बारीक नक्काशी से उस युग के महल, रथ, बौद्धिवृक्ष, विवाह, ज्ञान, जन्म, श्रृंगार, युद्ध और जीवन के अनेक महत्वपूर्व प्रसंगों का जीवंत प्रदर्शन किया है। कलिंग युद्ध के बाद आशोक ने शांति की खोज में ये स्तूप निर्माण कराकर मानवजाति को अद्वितीय विरासत दी है। रायसेन का किला अपनी ऊंचाई के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इतनी ऊंचाई पर आज भी जलकुंड में हमेशा पानी रहना, सबको आश्चर्यचकित करता है। यहां के जौहर और अन्य जातक कथाओं से पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं। रायसेन जिले में भोपाल के समीप चिड़िया टोल नाम से प्रसिद्ध चट्टान भी पर्यटकों का ध्यान बरबस खींच लेती है। इस मार्ग के यात्री पहले यहां ठहरने के लिए रुकते थे जो अब एक दर्शनीय स्थल के रूप में जाना जाता है। भोपाल का ताल तो अपनी सुंदरता के कारण प्रत्येक आगंतुक का ध्यान अपनी ओर खींचता ही है। इन दिनों श्यामला पहाड़ी पर स्थित जनजातीय संग्रहालय जीवंत विरासत (लिविंग हेरिटेज) के रूप में भोपाल के पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां जनजातीय रीति-रिवाज, परम्पराओं और जीवन शैली को इतने आकर्षक रूप से प्रस्तुत किया गया है कि प्रत्येक पर्यटक मंत्र मुग्ध हो जाता है। पीजी डिप्लोमा टूरिज्म होटल मैनेजमेंट के छात्र-छात्राओं ने इस शैक्षणिक भ्रमण का भरपूर आनंद उठाया और ऐतिहासिक स्‍थलों के बारे में उपयोगी जानकारी हासिल की। इस भ्रमण में पर्यटन विशेषज्ञ प्रो ललित गौड़, पाठ्यक्रम समन्वयक डा संजय जैन सहित सभी छात्र-छात्राओं ने उत्साह से सहभागिता की।

Posted By: Ravindra Soni

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