Bhopal News: भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। रवींद्र भवन में शनिवार को गमक श्रृंखला के अंतर्गत नाटक 'डाकघर" का मंचन किया गया। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन मनोज मिश्रा ने किया एवं रीवा के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। डेढ़ घंटे के इस नाटक में एक एकाकी लड़के की व्यथा का चित्रण है। ग्रुप नाटक के अबतक छह शो कर चुका है। एक घंटे 15 मिनट के नाटक में छह कलाकारों ने ऑनस्टेज अभिनय किया। ये नाटक 1914 के आसपास लिखा गया। डायरेक्टर का कहना है कि बच्चे अपने आप कभी दुखी नहीं होते। स्टेज को व्हाइट बैकग्राउंड दिया गया। विदूषकीय शैली में सभी पात्र जोकर की तरह दुखभरी घटना को भी हास्य के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

और उड़ गई चिड़िया

नाटक की कहानी 20वीं सदी के बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र पर आध्ाारित है। नाटक में अमल नामक लड़के को लाईलाज बीमारी है। उसके फूफा उसे अपने गांव लेकर आ जाते हैं। बीमारी के कारण वह अपने कमरे से बाहर जाने में असमर्थ है। अमल कमरे की खिड़की के पास से गुजरने वालों से बात करने लगता है। इन्हीं में से एक लड़की है सुध्ाा, जो उसके लिए प्रतिदिन फूल लाती है। अमल को यह जानकर खुशी होती है कि उसके पड़ोस में राजा, डाकघर खुलवा रहे हैं। अमल की इच्छा होती है कि राजा उसे भी पत्र लिखे। गांव के मुखिया को अमल की इस इच्छा का पता चलता है। तो वह अमल को राजा के वैद्य का लिखा फर्जी पत्र दिखाता है। इध्ार, दादा नाम का किरदार उसकी हर इच्छा पूरी करना चाहता है। वह बहरूपिया बनकर उसकी हर इच्छा पूरी करने में लग जाता है। नाटक के अंत में अमल की मृत्यु हो जाती है और तभी सुध्ाा उसके लिए फूल लेकर आती है। नाटक के अंत में अमल की मौत को प्रतीक के रूप में दिखाते हैं। उसकी मौत के दृश्य में चिड़िया उड़ जाती है और सूरज मद्धम होकर चांद की तरह हो जाता है।

शहीद भवन में नाटक दो कदम पीछे का मंचन

शहीद भवन में शनिवार की शाम केजी त्रिवेदी निर्देशित नाटक दो कदम पीछे का मंचन किया गया। त्रिकर्षि द्वारा प्रस्तुत नाटक में दो मुख्य पात्रों द्वारा दर्शाया गया कि व्यक्ति बाहर की दुनिया में कितना भी बड़ा क्यों न हो, लेकिन घर में वो पिता, पति और पुत्र ही है। यह नाटक सिर्फ रिश्तों का ताना-बाना नहीं दर्शाता, बल्कि समाज और परिवार के मध्य प्राथमिकताओं को चुनने के अवसर को भी दर्शाता है। नाटक का मुख्य पात्र सुध्ााकर नाटक के क्षेत्र में नामी-गिरामी नाम है, लेकिन कई अवार्ड से सम्मानित सुध्ााकर अपने जीवन में अकेला है और वह अपने रंगमंच की दुनिया को पूरी तरह से छोड़ नहीं पाया है। नाटक की शुरुआत सुध्ााकर के घर से होती है, जिसमें एक दिन अचानक महिला मेहमान उसके बिना कहे ही अंदर आ जाती है। पता चलता है कि महिला मेहमान यानी मालती उसकी पहली पत्नी है जिससे सुध्ााकर का कई साल पहले तलाक हो चुका है। नाटक में आगे के दृश्य में वह अपने जीवन के विभिन्ना पहलुओं पर अपनी निजी जिंदगी पर चर्चा करते हैं।

दिवाकर के नाम को लेकर होता है दोनों में झगड़ा

नाटक के आगे के दृश्य में वो दोनों अपने जीवन के विभिन्न् पहलुओं पर चर्चा करते हैं तो इसी बीच सुध्ााकर को पता चलता है कि मालती उसके अपने दोस्त दिवाकर की पत्नी है उसके नाम को लेकर दोनों में झगड़ा होता है, लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि दिवाकर की मौत हो चुकी है। बातचीत में यह भी पता चलता है कि सुध्ााकर की दूसरी पत्नी को सुध्ााकर ने छोड़ दिया है। नाटक के अंत तक दोनों को एहसास होता है कि वह एक दूसरे के प्यार को भुला नहीं पाए, सुध्ााकर और मालती तय करते हैं जीवन में अपने अहम को छोड़कर , दो कदम पीछे हटकर रिश्तों को बचाया जा सकता है। रिश्तों को पुन: जिया जा सकता है और वह दो कदम पीछे हटने का निर्णय लेते हैं।

मंच पर कलाकार: मालती की भूमिका में अर्चना कुमार और सुध्ााकर की भूमिका में केजी त्रिवेदी ने अभिनय किया।

Posted By: Ravindra Soni

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