भोपाल। राजधानी के नोबेल अस्पताल में प्रसव का अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां नौ महीने की प्रेगनेंसी के बाद एक महिला प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची। डॉक्टरों ने सोनोग्राफी किए बिना सीजर कर दिया। बाद में परिजन को बताया गया कि महिला को गर्भवती होने का भ्रम था। जिसे स्यूडो प्रेगनेंसी कहा जाता है। उधर, परिजन का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने प्रसव के बाद बच्चा गायब कर दिया है।

प्रेम कुमार पाल सीआरपीएफ बंगरसिया में कर्मचारी हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनकी पत्नी कृष्णा पाल को नौ महीने का गर्भ था। समय पूरा होने पर वह 2 जून को प्रसव के लिए नोबल अस्पताल ले गए थे। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा सीजर करना पड़ेगा। महिला के मुताबिक उसने डॉक्टरों को बताया कि अभी तक उसकी एक भी सोनोग्राफी नहीं हुई है, इसलिए सीजर करने के पहले सोनोग्राफी कर लें। इस पर डॉक्टरों ने तर्क दिया कि पहले दो बेटियां सीजर डिलिवरी से हो चुकी हैं, अब साधारण प्रसव होने की संभावना नहीं है। लिहाजा सीजर करने की जरूरत भी नहीं है।

ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला के पेट में बच्चा नहीं था। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक महिला का स्यूडो प्रेगनेंसी थी। उसे पूरे नौ महीने तक यह भ्रम रहा कि गर्भवती है।

इस सूचना के बाद प्रसूता के पति ने अस्पताल में हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नौ महीने तक इलाज वाली फाइल अस्पताल प्रबंधन ने गायब कर दी है। प्रसव के दौरान जो फाइल बनी थी वह भी नहीं है। उनका कहना था कि डॉक्टर कुछ बताने को तैयार नहीं है।