भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। ट्रेनों की चपेट में आकर बाघ, तेंदुए की मौत न हो, इसके लिए रेलवे ने बरखेड़ा—बुदनी के जंगल में रेलवे ट्रैक पर 20 अंडपास और पांच ओवरपास में से कुछ का काम 50 फीसद पूरा कर दिया है। पांच पहाड़ी इलाकों को काटने की जगह उनमें सुरंग बनवा रहा है। इनमें से दो सुरंगें तो लगभग तैयार हो गई हैं। ओवरपास और सुरंगों के उपर से और अंडरपास के नीचे से बाघ, तेंदुए और दूसरे वन्यप्राणी आसानी से जंगल के एक से दूसरे हिस्सों में आ जा सकेंगे। अभी ये रेलवे ट्रैक पार करके आना-जाना करते हैं। ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं और मौत हो जाती है। बीते पांच साल में पांच बाघ, चार तेंदुए और 12 से अधिक भालू समेत दूसरे वन्यप्राणियों की मौतें हो चुकी हैं।

दरअसल, भोपाल से इटारसी के बीच बरखेड़ा-बुदनी का जंगल पड़ता है। यह 25 किलोमीटर का घना और पहाड़ी जंगल है। यहीं से भोपाल-इटारसी तीसरी रेल लाइन बन रही है। पूर्व से दो मौजूदा लाइनों पर ट्रेनें चल रही है। इस क्षेत्र में अब तक दो लाइनें थी। जिन पर आए दिन बाघ, तेंदुए और दूसरे वन्यप्राणी आ जाते थे, मौतें होती थी। तीसरी रेल लाइन चालू हुई तो ये घटनाएं और बढ़ जाएंगी।

इसे देखते हुए मप्र वन्यप्राणी बोर्ड ने रेलवे को लाइन का काम शुरू करने से पहले बाघ, तेंदुए समेत दूसरे वन्यप्राणियों के आवागमन को सुचारू करने के लिए रेलवे ट्रैक पर अंडरपास, ओवरपास बनाने की अनिवार्यता रखी थी। यह भी कहा था कि नई लाइन के लिए पहाड़ काटने की बजाए सुरंगें बनाई जाए। रेलवे ने इन कामों को एक साल पहले शुरू किया था, इनमें से कुछ काम 50 फीसद पूरे हो चुके हैं। यह लाइन साल 2022 तक चालू करने का लक्ष्य है। बीना से इटारसी के बीच बाकी सभी हिस्सों में तीसरी लाइन चालू हो चुकी है।

यात्रियों को ये फायदें

बरखेड़ा-बुदनी घाट सेक्शन में तीसरी रेल लाइन चालू होने से ट्रेनों का आवागमन सुचारू होगा। सामान्य दिनों में अधिक दबाव होने पर ट्रेनों की गति कम नहीं करनी पड़ेगी। ट्रेनों को रोकने की नौबत नहीं आएंगी। ट्रेनें भोपाल से इटारसी के बीच जल्द पहुंचेंगी। यात्रियों का 10 से 15 मिनट बचेगा।

वर्जन

बरखेड़ा-बुदनी के बीच तीसरी रेल लाइन का काम करवाने वाली नोडल एजेंसी रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों को वन्यप्राणियों की सुरक्षा को देखने में रखते हुए तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। रेलवे भी समय-समय पर कामों की प्रगति की समीक्षा कर रहा है।

— उदय बोरवणकर, डीआरएम भोपाल रेल मंडल

Posted By: Lalit Katariya

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