भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। यहां बनाई जा रही तीसरी आधुनिक पिट लाइन का काम काम पूरा हो गया है। रेलवे ने इस पर इंजन ट्रायल भी कर लिया है, जो सफल रहा है। अब यहां से ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। किसी भी स्टेशन के पास नई ट्रेनों को चलाने व दूसरे स्टेशनों से चलाई जाने वाली ट्रेनों को लेने के लिए पिट लाइनों का होना बहुत जरूरी होता है। ट्रेनों को चलाने से पहले और कहीं से आने के बाद इन्हीं लाइनों पर उनका रख-रखाव व कोचों की धुलाई की जाती है। अभी रानी कमलापति स्टेशन के पास दो पिट लाइनें है और यहां से सात ट्रेनें चलाई जाती है, जिनके रख-रखाव के लिए ये लाइनें कम पड़ जाती थी।

बता दें कि हबीबंगज यार्ड में तीसरी पिट लाइन का काम 2016 में स्वीकृत हुआ था। इसके निर्माण पर 10 करोड़ रुपये खर्च होने थे। काम में देरी के कारण यह लागत बढ़ गई थी। कैमटेक डिजाइन की पिट लाइन है। इस डिजाइन में लाइनों को ऊंचाई पर बनाया जाता है, ताकि जब ट्रेन इस लाइन पर खड़ी हो तो उसके नीचे छोटी-छोटी मशीनों का मूवमेंट आसानी से होता रहे। साथ ही ट्रेनों का सुधार करने वाले रेलकर्मी भी लाइन के नीचे आसानी से आना-जाना कर सकें। इन सभी मापदंडों के तहत इस लाइन का निर्माण किया गया है। भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों का कहना है कि पहले ही दो बार ठेकेदार से लाइन का काम पूरा कर हैंड ओवर मांग चुके थे। अब जल्द ही हैंडओवर ले लिया जाएगा।

अभी 105 ट्रेनें ठहर रही

अभी रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर दोनों दिशाओं में 105 ट्रेनें ठहराव लेकर चलती हैं। इनमें से सात ट्रेनें ऐसी है, जो इसी स्टेशन से प्रारंभ होती है और और यहीं खत्म होती है। इन ट्रेनों का रख-रखाव नई लाइनों पर करने में मदद मिलेगी। नई ट्रेनें चलाने पर भी पिट लाइन की कमी आड़े नहीं आएगी। बता दें कि इस स्टेशन से आने वाले एक वर्ष के दो वंदे भारत एक्सप्रेस भी चलनी है। यह लाइन इन ट्रेनों के रैकों का रख-रखाव करने में सक्षम होगी।

ट्रेनों की संख्या इसलिए बढ़ाई जानी है

यह विश्वस्तरीय स्टेशन है। इसे अधिक यात्रियों की क्षमता के अनुरूप डिजाइन किया है। नए भोपाल का विस्तार काफी हो चुका है इसलिए यहां यात्रियों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। भोपाल में ठहरने वाली 132 ट्रेनों में से कुछ का ठहराव इस स्टेशन पर हो सकता है। दूसरे मंडलों से भी इस स्टेशन तक ट्रेनें चलाने की योजना है, जिनका रख-रखाव करने में मदद मिलेगी।

Posted By: Ravindra Soni

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