भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। भोपाल के निशातपुरा स्थित रेल कारखाने को नया मुख्य कारखाना प्रबंधक नहीं मिला है। कोटा के मुख्य कारखाना प्रबंधक मनीष गुप्ता को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह स्थिति मुख्य कारखाना प्रबंधक रहे मनीष अग्रवाल का प्रमोशन होने से बनी है। रेलवे बोर्ड ने एक हफ्ता पूर्व उन्हें तिरुचिलापल्ली का डीआरएम बनाकर भेज दिया है। भोपाल रेल कारखाना को नया मुख्‍य प्रबंधक नहीं मिलने के कारण कामकाज पर असर पड़ने लगा है। जबसे कोटा रेल कारखाने के मुख्य कारखाना प्रबंधक मनीष गुप्ता को प्रभार दिया है, तब से उन्होंने एक बार भी भोपाल आकर कामकाज नहीं देखा है। आगे भी यही स्थिति रही तो कामकाज प्रभावित होना तय है।

मुख्य कारखाना प्रबंधक इसलिए जरूरी

— भोपाल का निशातपुरा रेल कारखाना काफी बड़ा है। यहां 2300 से अधिक रेलकर्मी काम करते हैं।

— इस कारखाने में पुराने कोचों का निर्माण नए तरीके से किया जा रहा है।

— अब तो एलएचबी कोचों का भी मेंटेनेंस व पुननिर्माण शुरू हो गया है।

— हर साल कारखाने में 700 से अधिक कोचों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 1500 करने की कोशिश है।

— इस कारखाने में समय-समय पर हमसफर जैसी ट्रेनों के कोचों को तैयार किया जाता रहा है। इन सभी कामों के लिए स्थायी रूप से मुख्य कारखाना प्रबंधक का होना जरूरी है, जो कि बीते एक सप्ताह से नहीं है।

रेलवे बोर्ड और जोन को करनी है नियुक्ति

भोपाल के रेल कारखाना में मुख्य कारखाना प्रबंधक की नियुक्ति रेलवे बोर्ड को करनी है। वरिष्ठता के आधार पर रेलवे बोर्ड को भरोसे में लेते हुए पश्चिम मध्य रेलवे भी मुख्य कारखाना प्रबंधक नियुक्त कर सकता है, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में कारखाना बगैर मुख्य कारखाना प्रबंधक के बहुत कम रहा है।

Posted By: Ravindra Soni

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