भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी में भोपाल रेलवे स्टेशन पर दो महीने के भीतर प्रवेश व निकास व्यवस्था बदल जाएगी। अभी स्टेशन पर तीन मुख्य प्रवेश द्वार है। प्लेटफार्म-एक पर बनकर तैयार नए भवन को यात्रियों के लिए खोलने के बाद यह संख्या चार हो जाएगी। नया भवन पुराने आरपीएफ थाने से मुख्य प्रवेश द्वार के बीच बनाया है, जो तीन मंजिला है। इसकी लागत करीब 20 करोड़ है। इस ओर पहले से दो प्रवेश द्वार है। इसे नए फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) से ऐस्केलेटर व सीढ़ियों के जरिए जोड़ दिया है। यह एफओबी सीधे प्लेटफार्म-छह की ओर मुख्य भवन से जुड़ा है। इस तरह भवन के चालू होने के बाद यात्री अधिकतम तीन मिनट में दोनों भवनों से होकर यात्री छह प्लेटफार्म पार कर सकेंगे। अभी एक प्लेटफार्म-एक पर उतरकर छह नंबर व छह नंबर पर उतरकर एक नंबर प्लेटफार्म की ओर से बाहर निकलने वाले यात्रियों को 10 से 15 मिनट लगते हैं। इसकी वजह सीधी कनेक्टिविटी का नहीं होना है। जिसकी वजह से प्लेटफार्म पर अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। यात्री भीड़ का सामना भी करते हैं।

ये होंगी नए भवन में सुविधाएं

एसी वेटिंग रूम, डोरमेट्री- एसी वेटिंग रूम व डोरमेट्री रूम होंगे।

पीआरएस- सभी तरह के टिकट भूतल में मिलेंगे। अभी यह सुविधा पुराने भवन में अलग-अलग भवनों में मिल रही है। इसके लिए कांच के केबिन तैयार किए जा रहे हैं।

रेस्टोरेंट- भूतल को छोड़कर ऊपर के माले पर यह सुविधा होगी। इसका संचालन आइआरसीटीसी द्वारा किया जाएगा।

बहुपयोगी स्टाल- भूतल में कुछ बहुउपयोगी स्टाल को अनुमति दी जाएगी। मेडिकल स्टोर खोला जाएगा।

शौचालय- महिला, पुरुष यात्रियों के लिए अलग-अलग होंगे।

पूछताछ केंद्र- ट्रेनों की जानकारी के लिए यात्री पूछताछ सेवा केंद्र भी इसी में होगा।

प्लेटफार्म से सीधे जुड़ेगा- यह प्लेटफार्म-1 से सीधे जुड़ेगा।

टिकट वेंडिंग मशीन - चार मशीनें लगाई जाएंगी, यात्रियों को तुरंत सामान्य टिकट मिल सकेंगे।

रेलवे दफ्तर:- पुराने भवन में संचालित हो रहे कुछ दफ्तरों को भी इसमें शिफ्ट किया जाएगा।

अभी नए भवन में ये काम हुए

- ऐस्केलेटर का ट्रायल पूरा हो गया है। सीढ़ियों की फिनिशिंग हो गई है।

- इलेक्ट्रानिक घड़ी चालू कर दी है। अनाउंसमेंट सिस्टम इंस्टाल कर दिया है।

- इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले लगा दिए हैं। यात्रियों के लिए जगह-जगह संकेतक बोर्ड व चिन्ह लगाए जा रहे हैं।

- दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ब्रेल लिपि युक्त बोर्ड लगाए जा रहे हैं।

हजारों यात्रियों को फायदा

इस स्टेशन पर चौबीस घंटे में 132 से अधिक ट्रेनें ठहराव लेकर चलती है। इनमें से रोज करीब 25 हजार यात्री चढ़ते-उतरते हैं। त्यौहारों के समय यह संख्या बढ़ जाती है। नए भवन व विस्तार की जाने वाली सुविधाओं से इन्हें फायदा होगा।

नया भवन इसलिए खास

डीआरएम सौरभ बंदोपाध्याय का कहना है कि भवन के अंदर भोपाल व मप्र की सांस्कृतिक, प्राकृतिक धरोहरों को शामिल करने की कोशिशें की हैं। पर्यटन की दृष्टि से राजा भोज, सांची बौद्ध स्तूप के कुछ हिस्सों को चित्रकारी के माध्यम से स्थान दिया है।

Posted By: Ravindra Soni

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