संदीप चंसौरिया, भोपाल। युवक कांग्रेस ने बीते दिनों महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर राजधानी में हल्लाबोल आंदोलन का शंखनाद किया। युवाओं के साथ बुजुर्ग नेताओं ने भी मंच से शंख फूंका। हालांकि, पार्टी के कुछ उत्साही नेता शंखनाद के लिए बाकायदा गुफा मंदिर से 11 बटुकों को लेकर आए थे। मंच पर जिन्हें पीछे की पंक्ति में खड़ा किया गया था। वह मंत्रोच्चार तो कर रहे थे, लेकिन भाषणबाजी के चलते मंत्र हवा में ही तैर रहे थे। शंख की गूंज भी युवाओं के हल्लाबोल में दब गई। मंच से जैसे ही हल्लाबोल का उद्धोष हुआ तो नेताओं की मैराथन शुरू हो गई और बटुक मंच पर ही रह गए। अब उन्हें वापस गुफा मंदिर जाना था लेकिन लाने वाला भी गायब हो चुका था। आखिरकार बिना दान-दक्षिणा के वह अपने साधन से रवाना तो हो गए, पर जाते-जाते भरे मन से कह गए, यह ..... की पार्टी है।

ताज में रिश्ते हुए ताजे

प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बेटे के विवाह उपलक्ष्य में राजधानी के होटल ताज में प्रीतिभोज दिया गया। सियासतदारों से लेकर हुकुमरानों तक के लिए यह भोज वास्तव में प्रीत का अवसर बन गया। मिल बैठे वे सारे यार जो वर्षों से आपस में गिले शिकवे लिए बैठे थे। यह मौका उन लोगों के लिए भी सुअवसर लेकर आया जो अपने बिगड़े काम बनाने या नई बात जमाने के लिए राह तलाश रहे थे। लिहाजा, किसी ने हम निवाला होकर अपनी बात जमाई तो किसी ने हम प्याला बन भूली-बिसरी यादें ताजा कीं। कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने पूरे समय फोटो सेशन पर फोकस किया और अगले दिन सोशल मीडिया पर रंगत जमाई। लिहाजा, आयोजन के बाद प्रीतिभोज यूं चर्चा में आया कि अब उन्हें तलाशा जा रहा है जिनके चेहरे पर इन दिनों निखार दिखाई दे रहा है। कुछ मायूस भी हैं, जो इसमें शामिल नहीं हो सके।

पूरी मिलै न आधी पावै

आधी छोड़ पूरी को धावै, पूरी मिलै ने आधी पावै। यह कहावत भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों पर सटीक बैठ रही है। पिछड़ा वर्ग को दोनों दल पंचायत व नगरीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने का लगातार लालीपाप दे रहे हैं। प्रदेश की आबादी में 56 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह वर्ग भी 14 से सीधे 27 प्रतिशत भागीदारी की उम्मीद से गदगद है। यह अलग बात है ख्यालों के बीच हकीकत कुछ और है। दरअसल चुनाव हुए तो अब पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटें भी अनारक्षित करनी पड़ेंगी। लिहाजा, दावों को लेकर दोनों दलों में फजीहत भी खड़ी होगी। फजीहत इस बात की, कि किसे नाराज कर किसे खुश करें, क्योंकि जो भी सीट कटेगी वह सामान्य की कटेगी। यानी 27 के फेर में सधे सधाए 14 प्रतिशत तो गए ही उल्टा अब एक को साधने में दूसरे वर्ग की नाराजगी दूर करना मुश्किल होगी।

एजेंडा कुछ भी हो इनका मुद्दा तय है

प्रशासन की बैठक हो या फिर देशव्यापी मसला ही क्यों न हो। इनका अपना मुद्दा तय होता है। मुद्दा भी वो जो इनके लिए सुर्खी का सबब बने। फिर उसके लिए चाहे जो बोल बच्चन क्यों न करने पड़ें, इन्हें कोई रोक नहीं सकता। हाल के ही इनके कुछ मुद्दों पर गौर फरमाएं तो हिजाब का मामला यूं तो देशव्यापी था लेकिन सुर्खियों के लिए चचा ने लपकते देर नहीं की। अपने कालेज में हिजाब में क्रिकेट खिलवा दिया। पंडितजी की बारी आई तो उन्होंने यूपी से आयातित बुलडोजर पर मामा को सवार करवा दिया और तो और बाघ को शेर बता दिया। हाल में नगरीय प्रशासन मंत्री शहर विकास की बैठक ले रहे थे और दोनों ने बापू की कुटिया व जमजम के बंद होने का राग छेड़कर सुर्खियां बटोर लीं लेकिन सोचने वाली बात तो यह है कि सही में यह राग क्या शहर विकास का था।

Posted By: Ravindra Soni

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