भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। भोपाल जिले के तीसरी कक्षा के 42 फीसद बच्चे ही 999 अंक का स्थानीय मान लिख और पढ़ पा रहे हैं। 46 फीसद ही जोड़-घटाव व गुणा-भाग को समझ पाते हैं। इसके अलावा 38 फीसद कागज को मोड़कर और सरल रेखा से बनी आकृतियों को पहचान पाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल पर्यावरण अध्ययन विषय का भी है। इसमें 46 फीसद बच्चे ही परिवार के सदस्यों के आपसी संबंधों को समझ पाते हैं, साथ ही 55 फीसद बच्चे पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के लिए पानी और भोजन की उपलब्धता को समझते हैं। ऐसे ही गणित में पांचवीं कक्षा के 35 फीसद बच्चे त्रिकोण, चतुर्भुज आदि आकृति को समझ पाते हैं और 47 फीसद बच्चे बैंक, पुलिस स्टेशन व पंचायत की कार्य प्रणाली को समझते हैं।

यह जानकारी राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे (एनएएस) 2021 कि रिपोर्ट में सामने आई है। इसमें मप्र के कक्षा आठवीं और दसवीं के मुकाबले तीसरी और पांचवीं के विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, भोपाल जिले की सर्वे रिपोर्ट देखें तो तीसरी और पांचवीं के मुकाबले आठवीं और दसवीं के बच्चों का प्रदर्शन अच्छा है। इस सर्वे में चारों कक्षाओं में दमोह, पन्नाा, भिंड, सीधी व छतरपुर शीर्ष पांच जिलों में शामिल रहे। जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले का प्रदर्शन पीछे रहा। भोपाल जिला तीसरी कक्षा में 25वें स्थान, पांचवीं में 24वें, आठवीं में 12वें व दसवीं में सातवें स्थान पर रहा। बता दें कि इस सर्वे में तीसरी, पांचवीं, आठवीं और दसवीं में विद्यार्थियों द्वारा विकसित योग्यता की जांच की जाती है। मप्र में पिछले साल हुए सर्वेक्षण में निजी और सरकारी दोनों तरह के 9,286 स्कूलों के 2,40,063 छात्रों ने भाग लिया। इसमें प्रदेश के 52 जिलों में बड़े महानगर पिछड़े नजर आए।

भोपाल राष्ट्रीय औसत से आगे, लेकिन अन्य जिलों से पीछे

इस सर्वे के तहत तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों का भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन में मूल्यांकन किया गया। जिसमें मप्र में औसत प्रदर्शन 62.67 दिखा, जबकि राष्ट्रीय औसत 59 फीसद है। भोपाल का औसत प्रदर्शन 62.6 फीसद रहा। इसके साथ ही कक्षा पांचवीं के विद्यार्थियों के लिए भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन में भी मूल्यांकन किया गया। जिसमें मप्र का प्रदर्शन 53.7 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 49 फीसद और भोपाल का औसत प्रदर्शन 52.8 फीसद रहा। हालांकि, आठवीं के विद्यार्थियों का भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन किया गया था। इसमें मप्र का औसत प्रदर्शन 45 फीसद रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत 41.9 फीसद और भोपाल का औसत प्रदर्शन 47.4 फीसद है। इसी तरह दसवीं का गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी में विद्यार्थियों के मूल्यांकन के बाद राष्ट्रीय औसत 37.8 फीसद है। इसमें मप्र का औसत 38.5 फीसद रहा। वहीं, दसवीं में भोपाल का औसत 44.4 फीसद रहा।

आठवीं में 29 फीसद ही बड़े अंकों का गुणा-भाग कर सकते हैं

सर्वे में यह सामने आया है कि 29 फीसद बच्चे ही बड़े अंकों का गुणा-भाग कर सकते हैं। वहीं, 23 फीसद विद्यार्थी दैनिक जीवन के प्रश्नों को हल कर सकते हैं। इसी तरह 10वीं में 19 फीसद विद्यार्थी ही रेखागणित के प्रश्नों को हल कर पाते हैं।

फीसद में कक्षावार महानगरों की स्थिति

जिला तीसरी -पांचवीं -आठवीं -दसवीं

भोपाल - 62.6(25वें)- - 52.8 (24वें) - 47.4(12वें) - 44.4(7वें)

जबलपुर - 61.9 (24वें)- - 49.3(32वें) - 42.9 (25वें) - 39.3(15वें)

ग्वालियर - 61.8(27वें) - 55.9(17वें) - 47.1(13वें) - 41.3(11वें)

इंदौर - 59.1 (34वें)- -51.7(29वें) -45.6 (18वें) - 40.3(13वें)

तीसरी कक्षा में शीर्ष पांच जिले

दमोह- 80.6 फीसद

पन्न- 77.4 फीसद

भिंड- 74 फीसद

छतरपुर- 73.7 फीसद

सीधी- 71.5 फीसद

पांचवीं में शीर्ष पांच जिले

दमोह- 73.6 फीसद

पन्ना- 71.3 फीसद

भिंड- 71.3 फीसद

छतरपुर- 67.5 फीसद

रायसेन- 67.4 फीसद

आठवीं में शीर्ष पांच जिले

भिंड- 60.5 फीसद

दमोह- 58 फीसद

सीधी- 56.3 फीसद

रायसेन- 55.6 फीसद

छतरपुर- 55.4 फीसद

दसवीं में शीर्ष पांच जिले

पन्न- 51 फीसद

भिंड- 49.1 फीसद

सीधी- 48.5 फीसद

रायसेन- 46.2 फीसद

टीकमगढ़- 44.7 फीसद

इस बार मप्र ने राष्‍ट्रीय उपलब्‍धि सर्वे में पांचवें स्थान में जगह बनाई है। छोटे जिलों के बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। अभी समीक्षा की जा रही है। भोपाल, इंदौर जैसे महानगरों के स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता पर फोकस करने का लक्ष्य है।

- धनराजू एस, संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र

स्कूल शिक्षा विभाग को प्राथमिक शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर बच्चों का आधार मजबूत होना चाहिए।

- सुनीता सक्सेना, शिक्षाविद

Posted By: Ravindra Soni

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