भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। कुछ दिन मौसम में बदलाव होने से खुश हुए राजधानी के लोग अब दोबारा उदास हो गए हैं। वजह, वर्षा का न होना और गर्मी का फिर से बढ़ना। शनिवार की तुलना में रविवार को भोपाल का तापमान 1.2 डिग्री सेल्‍सियस बढ़ा है। सोमवार को भी सुबह ही गर्मी ने लोगों की हालत खराब कर दी थी। ऐसे में 2-3 कूलर-एसी बंद होने के बाद दोबारा शुरू करने की नौबत आ गई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि सोमवार शाम से मौसम बदल सकता है। 27 जून को प्रदेश के कुछ हिस्सों में वर्षा होगी और 28 से पूरे प्रदेश में झमाझम का दौर शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग के इन्हीं पूर्वानुमानों ने लोगों में उम्मीद जगा रखी है। हालांकि आमजन सहित मौसम विज्ञानियों का भी मानना है कि इस साल मानसून ने बहुत परेशान किया है। जून में इतनी कम बरसात पहले कभी नहीं हुई।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अलग-अलग स्थानों पर छह मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनके असर से कुछ नमी मिलने के कारण मप्र में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ रही हैं। मानसून के 28–29 जून से आगे बढ़ने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी पीके साहा ने बताया कि 20 जून को मानसून ने मप्र के 80 प्रतिशत भाग में प्रवेश कर लिया है। उसके बाद ताकत नहीं मिलने के कारण मानसून आगे नहीं बढ़ा है। इससे वर्षा की गतिविधियों में भी कमी आ गई है।

ये मौसम प्रणालियां हैं सक्रिय

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि पश्चिम राजस्थान पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात मौजूद है। इस चक्रवात से लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा से बंगाल की खाड़ी तक एक द्रोणिका लाइन बनी हुई है। पूर्वी अरब सागर में हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। दक्षिणी गुजरात से उत्तरी केरल तक अपतटीय द्रोणिका लाइन बनी हुई है। दक्षिणी छत्तीसगढ़ पर भी हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर गुजरात, कोंकण तक एक अन्य द्रोणिका लाइन मौजूद है। इन छह मौसम प्रणालियों के कारण वातावरण में कुछ नमी आ रही है। इस वजह से मप्र में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ वर्षा हो रही है।

Posted By: Ravindra Soni

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