भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अलग-अलग स्थानों पर पांच मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। विशेषकर पूर्वी मध्य प्रदेश पर वर्तमान में कम दबाव का क्षेत्र मौजूद है। मानसून ट्रफ भी मप्र में मौजूद है। इसके अतिरिक्त नर्मदापुरम पर शियर जोन भी बना हुआ है। इसके चलते भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन संभागों के जिलों में भारी वर्षा हो रही है। इसी क्रम में पिछले 24 घंटों के दौरान बुधवार को सुबह साढ़े आठ बजे तक बैतूल में 109.2, इंदौर में 108.9, छिंदवाड़ा में 96.6, भोपाल (शहर) में 83.2, धार में 80.3, पचमढ़ी में 75.6, खरगोन में 73.4, रतलाम में 73, नर्मदापुरम में 67.5, सिवनी में 67.4, उज्जैन में 53, रायसेन में 52, मलाजखंड में 38.5, नरसिंहपुर में 35, खंडवा में 24.8, भोपाल (एयरपोर्ट) में 21.8, मंडला में 17, सीधी में 4.2, उमरिया में 3.2, दतिया में 3.2, शिवपुरी में तीन, सागर में 1.2, दमोह में एक मिलीमीटर वर्षा हुई।

मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक जुलाई के बाद अगस्त में भी मानसून मप्र में लगातार सक्रिय बना हुआ है। इसके चलते राजधानी सहित प्रदेश के अधिकतर जिले तरबतर हो रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार तड़के भी राजधानी में झमाझम वर्षा हुई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक दोपहर के बाद शहर में तेज बौछारें पड़ने की संभावना है।

ये मौसम प्रणालियां हैं सक्रिय

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि ओडिशा में बना अवदाब का क्षेत्र कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होकर वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश पर सक्रिय है। सौराष्ट्र पर भी एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। मानसून ट्रफ सौराष्ट्र पर बने कम दबाव के क्षेत्र से भोपाल, पूर्वी मप्र पर बनी मौसम प्रणाली से होकर बंगाल की खाड़ी तक बना हुआ है। नर्मदापुरम के आसपास शियर जोन (पूर्वी-पश्चिमी हवाओं का टकराव) मौजूद है। बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल के तट पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। अलग-अलग स्थानों पर बनी इन पांच मौसम प्रणालियों के कारण मप्र के अधिकतर जिलों में वर्षा हो रही है। राजधानी में बुधवार को दोपहर के बाद बौछारें पड़ने की संभावना है।

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