भोपाल (राज्य ब्यूरो)। सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर मवेशी छोड़ने वालों पर अर्थदंड बढ़ाने का निर्णय सरकार चार माह बाद भी लागू नहीं कर पाई है। इसके लिए कैबिनेट ने अप्रैल में मध्य प्रदेश नगर पालिक विधि (संशोधन) अध्यादेश के प्रारूप का अनुमोदन कर दिया था, लेकिन इसे राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए इसे लौटा दिया था।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसे प्रस्तुत नहीं कर सका। अब फिर विधेयक का प्रारूप विधि विभाग को भेजा गया है। इसे विधानसभा के दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार ने अर्थदंड एक हजार रुपये तय किया है।

उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा विभिन्न याचिकाओं पर दिए गए निर्देशों के मद्देनजर सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर जानबूझकर या उपेक्षापूर्वक किसी मवेशी को छोड़ने या बांधने पर अर्थदंड बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह विभाग ने पांच हजार रुपये प्रस्तावित किया था, लेकिन मंत्रियों के सुझाव पर इसे एक हजार रुपये कर दिया गया। अध्यादेश के माध्यम से इस प्रविधान को प्रभावी करने की तैयारी भी हो गई थी, पर इसमें विलंब होता गया।

जुलाई में प्रस्तावित विधानसभा सत्र में विधेयक लाने का प्रस्ताव बना, लेकिन यह सितंबर हो गया। इसमें भी विभाग संशोधन विधेयक प्रस्तुत नहीं कर पाया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विधेयक लाने के लिए प्रारूप तैयार करके विधि विभाग को भेजा गया है। परीक्षण के बाद इसे प्रशासकीय अनुमोदन से विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

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