बर्ड फ्लू के एच 9-एन 2 वायरस पर होगी कारगर, एक डोज छह माह तक रहेगी प्रभावी

Bird Flu Vaccine: भोपाल, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला भोपाल (निशाद) ने बर्ड फ्लू यानी एवियन एंफ्लुएंजा (एच 9-एन 2) वायरस पर प्रभावी पहली स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है। तीन साल के शोध के बाद तैयार की गई इस वैक्सीन के तीन डोज बचाव के लिए मुर्गे-मुर्गियों को लगाए जाएंगे। एक डोज का असर लगभग छह महीने तक रहेगा। निशाद के विज्ञानियों ने बताया कि मृत वायरस से यह वैक्सीन तैयार की गई है। ऐसे में वैक्सीन लगने के बाद उस मुर्गी के अंडे खाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

निशाद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डा. बीएन त्रिपाठी ने सोमवार को यहां यह वैक्सीन लांच किया। अब व्यावसायिक उत्पादन के लिए यह तकनीक किसी वैक्सीन निर्माता को सौंपी जाएगी। वैक्सीन बनाने में डा. सी तोष, डा. मनोज कुमार, डा. एस नागराजन, डा. एचवी मुरगूकर और डा. संदीप भाटिया शामिल थे। निशाद के महानिदेशक डा. वीपी सिंह ने बताया कि एच9-एन2 दूसरे बर्ड फ्लू वायरस के मुकाबले कम व्याधिकारक है। इससे प्रभावित मुर्गियों की मौत नहीं होती, लेकिन वह अंडा कम देने लगती हैंं। इस वैक्सीन के लगने के बाद मुर्गिंयां बीमार नहीं होंगी, जिससे उत्पादकता पर असर नहीं पड़ेगा।

लंपी वायरस की वैक्सीन भी संभावित

डा. बीएन त्रिपाठी ने बताया देश के 23 राज्यों में पशुओं में फैली लंपी स्किन डिसीज (एलएसडी) की वैक्सीन भी अगले हफ्ते लांच हो सकती है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार और नेशनन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनवीआरआइ) बरेली ने मिलकर इस वैक्सीन को जीवित वायरस से एक वर्ष में तैयार किया है। उन्होंने बताया कि अभी वैक्सीन का मैदानी परीक्षण चल रहा है। बता दें कि इस बीमारी से प्रभावित मवेशियों में करीब 10 प्रतिशत की मौत हो जाती है।

मंकीपाक्स की भी हो सकेगी जांच, बीएसएल-4 लैब बनाने की तैयारी

निशाद के निदेशक डा. वीपी सिंह ने बताया कि लैब अभी बीएसएल-3 प्लस (बायोलाजिकल सेफ्टी लेवल) स्तर की है, इसे बीएसएल- 4 स्तर की बनाने का प्रस्ताव है। इस पर 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि उन्न्यन होने के बाद यहां पर निपाह, क्रीमियन कांगो हीमोरेजिक फीवर (सीसीएचएफ)और बहुत ज्यादा संक्रामक व खतरनाक अन्य वायरस की जांच भी हो सकेगी। डा. सिंह ने बताया कि अभी मंकीपाक्स के मामले बंदरों में देख्ाने को नहीं मिले हैं, लेकिन मामले आते हैं तो यह जांच भी हो सकेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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