भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। सरकारी व्यवस्था में दूसरों की सेहत का दुस्र्स्त रखने के लिए कोई कर्मचारी अपने पास रखी साड़ियां बांटे तो उसे धन्य ही कहा जाएगा। बैरसिया विकासख्ांड के नलखेड़ा गांव की आशा कार्यकर्ता अर्चना कुश्ावाह ने यही किया है। गांव के लोग खासतौर पर बुजुर्ग महिलाएं कोरोनारोधी टीका लगवाने के लिए आगे नहीं आ रही थीं तो उन्होंने टीका लगवाने वाली महिलाओं को अपने पास रखी साड़ियां बांटी। स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने 150 से ज्यादा नारे बनाए। इन नारों को दीवारों में लिखने का काम उनके पति चंद्रेश कुश्ावाह ने किया। चंद्रेश मजदूरी करते हैं , लेकिन इसके लिए पेंट और अन्य सामग्री भी उन्होंने अपने पैसे से खरीदी। डब्ल्यूएचओ का ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप अवार्ड देश भ्ार की आशा कार्यकर्ताओं को मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भी कुछ आशा कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। प्रदेश की दो आशा कार्यकर्ताओं का नाम उनसे बातचीत के लिए भेजा गया है। उनमें अर्चना कुशवाहा के और बड़वानी जिले की भगवती यादव शामिल हैं।

आशा कार्यकर्ता अर्चना बताती हैं कि हर दिन एक से दो घंटे तक सोचने के बाद स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए नारे बनाती थीं। यह नारे जब इंटरनेट मीडिया पर चले तो दूसरे राज्य और भारत सरकार ने भी अपनाया। कोरोना संक्रमण जब चरम पर था तो घर-घ्ार जाकर सर्वे किया। कोरोनारोधी टीका लगाने के लिए भी घर-घर गईं। वह बताती हैं कि उनके पति चंद्रेश ने खूब मदद की, जिसके चलते वह ऐसा कर पाईं।

एक हाथ नहीं फिर जज्बा तो देखिए

बड़वानी जिले की आशा भ्ागवती यादव का एक हाथ नहीं है। पति भी उनसे अलग हो गए हैं। इसके बाद भी उनका हौंसला देखते ही बनता है। आंगनबाड़ी में बच्चों का वजन करना हो या कोई अन्य काम। वह किसी से पीछे नहीं रहतीं। गर्भवती महिलाओं की देख्ारेख्ा, प्रसव आदि कामों में वह आगे रहती हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से उनका नाम प्रस्तावित किया गया है।

Posted By: Lalit Katariya

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close