भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में खून की कमी की वजह से किसी मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। जरूरत पड़ने पर इन अस्पतालों में ड्रोन से रक्त पहुंचाए जाने की योजना है। स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में इस तरह की सुविधा देखने के बाद मुख्यमंत्री कमल नाथ ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यह व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इसके लिए अभी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से अनुमति लेना होगी। डीजीसीए को भी इसके लिए अपने नियमों में बदलाव करना होगा।

मध्यप्रदेश में सीजर डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसूति) व सामान्य सर्जरी की सुविधा जिला अस्पतालों के साथ ही कई सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी है, लेकिन ब्लड बैंक सिर्फ जिला अस्पतालों में ही हैं। कुछ सीएचसी में ब्लड स्टोरेज यूनिट हैं, लेकिन सभी ग्रुप के रक्त यहां पर उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में किसी दुर्घटना, सीजर डिलीवरी या अन्य तरह की सर्जरी में किसी खास ग्रुप के रक्त की अचानक जरूरत होने पर ड्रोन के माध्यम से रक्त ब्लड बैंक से अस्पताल तक पहुंचाया जा सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि ड्रोन के माध्यम से 80 किमी दूर तक रक्त पहुंचाया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि दावोस में ड्रोन उपलब्ध कराने वाली कंपनी भारत में भी काम करती है। महाराष्ट्र में तो सरकार का इस निजी कंपनी से अनुबंध भी हो चुका है। डीजीसीए से अनुमति का इंतजार है।

सात ग्राम से नीचे रहता है 39 फीसदी प्रसूताओं का हीमोग्लोबिन

स्वास्थ्य विभाग के हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉॅरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 39 फीसदी महिलाओं के रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सात ग्राम से कम रहता है, जबकि यह 11 ग्राम से अधिक होना चाहिए। प्रसव के दौरान रक्त की कमी होने पर उन्हें जान का खतरा रहता है। ऑपरेशन से प्रसूति की नौबत आने पर भी खून की व्यवस्था नहीं हो पाती।

अभी यह दिक्कत

डीजीसीए के नियमों के अनुसार ड्रोन का उपयोग सिर्फ फोटोग्राफी के लिए पांच किमी की परिधि में किया जा सकता है। अब रक्त पहुंचाने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल के लिए डीजीसीए को अपने नियमों में बदलाव करना होगा।

नियमों में बदलाव के बाद सुविधा शुरू होगी

ड्रोन से सरकारी अस्पतालों में रक्त पहुंचाने का प्रस्ताव है। हालांकि, इसमें अभी डीजीसीए के नियमों के चलते शुरू करने में परेशानी आ रही है। नियमों में बदलाव होने के बाद ही यह सुविधा शुरू हो पाएगी।

-राकेश मुंशी, संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य (मप्र)

Posted By: Hemant Upadhyay