शशिकांत तिवारी, भोपाल। दुनिया में गाड़ी, घोड़ा और बंगला से लेकर विलासिता के हर संसाधन का मोल है। कहीं-कहीं तो जीवन के भी दाम लग जाते हैं। लेकिन, अनमोल है तो मां की ममता। जिसे ना कोई खरीद सका है ना इसका कहीं मोल मिलते सुना है। यही कारण है कि ममता के आगे मौत भी नहीं टिकती। वह काल से जीवन छीनने की ताकत रखती है। इसका प्रमाण मध्य प्रदेश के सागर जिले की नौ साल की वह बच्ची है, जो जन्म से अपने साथ घातक बीमारी लेकर आई, लेकिन ममता की छांव ने उसे अब तक हरा-भरा कर रखा है।

यहां बात हो रही है सागर के एक ऐसे परिवार की, जिसमें नौ साल की बच्ची जन्म से ही एचआइवी/एड्स रोग से पीड़ित है। जब वह ढाई साल की थी तब उसके माता-पिता इसी रोग का शिकार होकर दुनिया से विदा हो गए थे।

ऐसे कठिन समय में उसे भगवान के रूप में एक निःसंतान दंपती ने ना सिर्फ अपनी स्नेह भरी गोद में उठाया बल्कि यह भी साबित किया कि इंसान धन-दौलत और महल अटारी से ही बड़ा नहीं होता, वह तो दिल से बड़ा होता है। बच्ची को ममता की छांव और प्यार देने वाले दोनों पति-पत्नी एक निजी स्कूल में भृृत्य हैं।

बमुश्किल आठ-दस हजार रुपये महीने की आय है, लेकिन संवेदनाओं के वे इतने धनी हैं कि बच्ची के इलाज में कहीं कोई कमी नहीं आने देते। साथ ही उसे एक निजी स्कूल में पढ़ा भी रहे हैं। बच्ची स्कूल में बिना किसी भेदभाव के कक्षा तीसरी में पढ़ रही है।

जब खून के रिश्ते भी पीछे हो गए

बच्ची को गोद लेने वाले दंपती ने बताया कि उसको अपनाने के लिए उन्हें अपने परिवार से भी लड़ाई मोल लेनी पड़ी, क्योंकि उन्हें यह मंजूर नहीं था कि वह एचआइवी पीड़ित को गोद लें। एचआइवी संक्रमित होने के चलते पहले बच्ची के पिता की मौत हुई। इसके बाद एक भाई व एक बहन को भी इसी बीमारी ने लील लिया।

बच्ची ढाई साल की थी तभी मां की हालत बिगड़ने लगी। उसके मायके और ससुराल वालों में से कोई भी इस बच्ची को अपनाने को तैयार नहीं था। ऐसे में मां ने अपने एक परिचित से कहा कि इस बच्ची को कोई गोद लेना वाला मिले तो बताना। यह जानकारी उनको मिली तो वह अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में भर्ती मां ने रोते हुए अपनी बिटिया को उनको सौंप दिया।

इनका कहना है

बच्ची को गोद लेकर दंपती ने मानवता की मिसाल पेश की है। नियमित तौर पर उसे इलाज के लिए एंटी रिट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) सेंटर लेकर जा रहे हैं, जिससे बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है।

-प्रशांत मलैया, उप संचालक, मप्र राज्य एड्स नियंत्रण समिति

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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