- बेहतर संवाद स्थापित कर आपदा से निपटने के निर्देश

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

जिले की बंद पड़ी खदानों को जल स्रोत के रूप में विकसित करें। फेंसिंग कराएं और सभी खदानों के आसपास 500 पौधे लगाएं। इनकी देखभाल भी करें। इस पूरे कार्य की ऑनलाइन मॉनिटरिंग हो सके इस तरह की व्यवस्था बनाएं।

यह निर्देश शुक्रवार को भोपाल कमिश्नर कल्पना श्रीवास्तव ने भोपाल संभाग के सभी जिलों से आए कलेक्टर और खनिज अधिकारियों को दिए। उन्होंने बंद पड़ी खदानों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश देते हुए रेत के डंपरों की ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। इधर, जिला खनिज अधिकारी राजेंद्र सिंह परमार ने बताया कि शहर में 200 खदानें हैं। सभी खदानों के आसपास करीब पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे।

दरअसल, शुक्रवार को भोपाल कमिश्नर ऑफिस के सभागार में कलेक्टर कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। इसमें आईजी योगेश देशमुख सहित अन्य पुलिस अफसर भी मौजूद थे। कमिश्नर कल्पना श्रीवास्तव ने सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे मैदानी अमले के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर आगामी दिनों में संभावित अतिवर्षा की स्थिति में राहत और बचाव, पेयजल आपूर्ति और कानून व्यवस्था की स्थिति चाक-चौबंद रखें। सभी जिलों की वर्षाकाल में आपदा प्रबंधन कार्य योजना की समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे 24 घंटे सातों दिन कंट्रोल रूम संचालित करने के साथ ही आपदा प्रबंधन की टीम और बचाव उपकरण सुचारू रखें। बता दें कि जिले में पिछले दो सालों से नालों पर अतिक्रमण की सूची तैयार की गई है। हर बैठक में यह सूची लाई जाती है लेकिन आज तक सभी नालों से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है।

- 14 जून तक मांगी थी सर्वे रिपोर्ट अब तक तैयार भी नहीं हुई

भोपाल जिले में कितने नालों पर अतिक्रण पसरा हुआ है, जर्जर भवन कितने है, ऐसे कितने क्षेत्र है जहां जलभराव की स्थिति निर्मित हो सकती है, नालों की सफाई की प्रोग्रेस क्या है। इन बिंदुओं पर भोपाल कमिश्नर कल्पना श्रीवास्तव ने अफसरों ने 14 जून तक सर्वे रिपोर्ट मांगी थी लेकिन अब तक संबंधित अधिकारियों ने यह सूची तैयार नहीं की है। लिहाजा भोपाल कमिश्नर ने निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अतिवर्षा की स्थिति और जल भराव वाले क्षेत्रों में सड़क और पुल-पुलिया की स्थिति देख लें और जरूरत होने पर आवश्यक मरम्मत कार्य करें। उन्होंने राहत और बचाव कार्य के लिए पुलिस और होमगार्ड जवानों की पहले से ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए हैं ।

- संस्थागत प्रसव के दौरान न हो मां और बच्चे की मृत्यु

भोपाल कमिश्नर ने संभाग के सभी जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 3 माह की समय सीमा निर्धारित कर निर्देश दिए हैं कि इस दौरान सभी बुनियादी सेवाएं दुरूस्त की जाएं । उन्होंने कहा कि डाक्टर्स की नई समय सारणी के अनुसार वे उपस्थित हो। आरोग्यम के सभी 12 बिन्दुओं पर फोकस कर नागरिकों को समय पर उपचार दिलाएं। कमिश्नर ने सरकारी अस्पतालों में ही संस्थागत प्रसव कराने और मातृ तथा शिशु मृत्यु दर किसी भी हाल में नहीं बढ़ने देने के निर्देश दिए हैं।