भोपाल। शाहपुरा झील के पास कैंपियन स्कूल के सामने लगने वाले फूड स्टॉलों में आप गुणवत्ता की परवाह किए बिना पिज्जा, बर्गर व अन्य फास्ट फूड खा सकेंगे। इसे देश का नौवां क्लीन स्ट्रीट फूड हब बनाने का निर्णय हुआ है। यहां पर खाने की हर चीज आरओ के पानी से बनेगी। खान-पान से निकलने वाला कचरा भी सही तरीके से निपटाया जाएगा। बैठने के इंतजाम होंगे। फास्ट फूड बनाने व परोसने वाले के न तो नाखून बड़े मिलेंगे न ही बाल। गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए फूड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की टीम हर महीने इन स्टालों का निरीक्षण करेगी।

इंदौर के छप्पन मार्केट के बाद यह प्रदेश का दूसरा 'क्लीन स्ट्रीट फूड हब' होगा। एफएसएसआई स्टालों में खान-पान की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह कवायद कर रही है। प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन इसमें सहयोग कर रहा है। इसमें खान-पान की क्वालिटी सुधारने, सफाई व अपशिष्ट के निपटान पर फोकस रहता है। एफएसएसएआई से सर्टिफिकेट मिलने के बाद स्टाल के कर्मचारी तय ड्रेस में रहेंगे। हाथ में दस्ताने, सिर पर टोपी पहनना होगी। मेडिकल चेकअप के बाद ही उन्हें रखा जाएगा। खाने की गुणवत्ता अच्छी हो इसके लिए आरओ का पानी इस्तेमाल करना होगा। तेल, मसाले व अन्य चीजें भी एफएसएसएआई मापदंड के अनुसार होंगी। पॉलीथिन का उपयोग नहीं किया जाएगा। फास्ट फूड देने के लिए पर्यावरण फ्रेंडली डिस्पोजल का इस्तेमाल किया जाएगा। क्लीन स्ट्रीट फूड हब का लाइसेंस जुलाई तक मिलने की उम्मीद है। इसके बाद यह सब व्यवस्था लागू हो जाएगी।

सभी व्यवस्था खाद्य एवं औषधि प्रशासन करेगा

भोपाल के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके वर्मा ने बताया कि हब में आरओ पानी, बैठने की व्यवस्था, स्टाल कर्मचारियों के लिए टोपी, दस्ताने, ट्रेनिंग की व्यवस्था एफएसएसएआई और मप्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग करेगा। नगर निगम से गुमाश्ता व एफएसएसएआई के एक्ट के तहत लाइसेंस स्टाल संचालकों का पहले से है। नया लाइसेंस बनाने के लिए भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन मदद करेगा। हब में स्टाल लगाने के लिए अलग से कोई लाइसेंस नहीं लेना है न ही फीस देना है। एक बार लाइसेंस मिलने के बाद बीच में नए स्टाल नहीं लग सकेंगे। सभी स्टाल के बीच बराबर जगह होगी।

ऐसे मिलता है लाइसेंस

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की तरफ से आवेदन करने के एफएसएसएआई की टीम जांच के लिए आएगी। चेक लिस्ट के आधार पर देखा जाएगा कि कमियां क्या हैं। इसके बाद कर्मचारियों को साफ-सफाई व फूड पाइंजनिंग के बारे एक दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह सब होने के बाद टीम लाइसेंस देने के लिए निरीक्षण करेगी। लाइसेंस मिलने पर एफएसएसएआई की टीम निगरानी के लिए हर महीने दौरा करेगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हर हफ्ते निरीक्षण करेंगे। कमियां मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

देश में यहां हैं आठ फूड हब

डीके वर्मा ने बताया कि देश में इस तरह के अभी आठ फूड हब हैं। इनमें पांच गुजरात, दो महाराष्ट्र व एक मध्यप्रदेश के इंदौर के छप्पन दुकान में है। देश में 35 और नए क्लीन स्ट्रीट फूड हब बनाए जाने हैें। इसमें सबसे पहले भोपाल के शाहपुरा को बनाने की तैयारी है। संयुक्त संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ब्रजेश सक्सेना ने बताया शाहपुरा के बाद जल्द ही प्रदेश में अलग-अलग जिलों में 10 और फूड हब इसी तरह के बनाए जाएंगे।

Posted By: Saurabh Mishra

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