भोपाल। शिवराज सरकार के समय वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से निष्काषित संविदा कर्मचारियों को कमलनाथ सरकार वापस सेवा में रखेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक ने ऐसे सभी संविदाकर्मियों से 16 सितंबर तक आवेदन मांगे हैं। आवेदनों के आधार पर पुन: नियुक्तियां दी जाएंगी। सरकार के इस कदम से लगभग सात सौ कर्मचारियों की वापसी होगी।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक अगस्त को आधा दर्जन विभागों के आला अफसरों के साथ बैठक कर संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण सहित अन्य समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद भले ही योजना या प्रोजेक्ट समाप्त हो जाए पर संविदा कर्मचारियों को सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता है।

ऐसे सभी निष्कासित कर्मचारियों को दूसरी योजनाओं में रखा जाए और अब आगे से किसी को भी सेवा से बाहर नहीं किया जाएगा। इसके मद्देनजर मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक ने वर्ष 2016-17 में 17 संवर्गों के निष्कासित संविदा कर्मचारियों को फिर से सेवा में रखने के आवेदन-पत्र मांगे हैं।

इसके लिए 16 सितंबर अंतिम तारीख तय की गई है। मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सैयद जाफर का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर संविदा कर्मचारियों के हित में कदम उठाया है।

महिला एवं बाल विकास विभाग भी साढ़े चार सौ से अधिक पद सृजित कर रहा है। इसमें भी पुराने लोगों को ही रखा जाएगा। प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग के पास पहुंच चुका है। अन्य विभाग भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं।

विभागों ने नहीं दी रिपोर्ट

उधर, मुख्यमंत्री ने संविदा नीति के तहत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए जो नियम बनाए थे, उनकी पूर्ति की दिशा में विभागों द्वारा उठाए कदमों की रिपोर्ट अब तक सामान्य प्रशासन प्रशासन को नहीं सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक अगस्त को सात दिन का समय दिया था।

विभाग के दो बार स्मरण पत्र भेजने के बाद भी विभागों ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्य सचिव कार्यालय इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और जल्द ही मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक भी कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि कई विभागों ने नियम होने के बाद भी संविदा कर्मचारियों को समकक्ष नियमित पद के न्यूनतम वेतनमान का 90 फीसदी वेतन देने का पालन नहीं किया है।

Posted By: Sandeep Chourey