भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच तल्ख टिप्पणियों के आदान-प्रदान के बाद सियासी टकराव की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार व संगठन के बीच तालमेल के लिए बनी समन्वय समिति की पहली बैठक में दोनों नेताओं के बीच कड़वाहट के समाचारों से इस तरह की अटकलबाजियां बढ़ी हैं। नेताओं के समर्थक ताजा घटनाक्रम से चिंतित हैं लेकिन फिलहाल वे सार्वजनिक तौर पर संतुलित व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम से गुटीय राजनीति से जुड़े सिंधिया विरोधी कुछ बड़े नेता चुटकी लेकर बयानबाजी जरूर कर रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा किसान कर्ज माफी, अतिथि विद्वान और कुछ अन्य वचनों को लेकर की गईं टिप्पणियों के बाद शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ की तल्ख टिप्पणी आई, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

सिंधिया ने अतिथि विद्वानों के बीच पहुंचकर उनके पक्ष में सड़क पर उतरने का एलान किया और जवाब में मुख्यमंत्री ने जिस सख्त लहजे में तल्ख टिप्पणी की कि 'तो उतर जाएं सड़क पर" से माना जा रहा है कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं। इसके पहले सिंधिया की टिप्पणी पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया के सामने कभी इस तरह की बात नहीं की है।

राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अब अपनी सरकार के स्थायित्व के प्रति आश्वास्त हैं। हाईकमान को वे अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश कर चुके हैं। सूत्रों की माने तो कमलनाथ द्वारा पेश रिपोर्ट कार्ड से आलाकमान भी संतुष्ट हैं।

सूबे के सियासी गणित को देखे तो कमलनाथ को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का साथ मिला हुआ है। इसे दिग्विजय सिंह की इस टिप्पणी से भी समझा जा सकता है जो उन्होने इस विवाद के बाद की थी कि 'वचन पत्र पांच साल के लिए है और अभी सरकार को सवा साल हुआ है।" इसी तरह सिंधिया विरोधी समझे जाने वाले कमलनाथ सरकार के वरिष्ठ मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा है कि वचन पत्र पूरी कांग्रेस पार्टी का है। इसे पूरे करने का सामूहिक दायित्व है। सड़क पर उतरने का काम विपक्ष का है। सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी का एक बयान वायरल हुआ है जिसमें वे इस मुद्दे पर कह रही हैं कि सिंधिया अगर सड़क पर उतरे तो पूरी कांग्रेस पार्टी उतरेगी लेकिन ऐसी नौबत नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि सिंधिया अकेले नहीं है बल्कि उनके साथ राहुल गांधी, मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह भी हैं।

कांग्रेस में कोई विरोध नहीं, 'ऑल इज वेल"

कमलनाथ सरकार में विधि और विधायी कार्य मंत्री पीसी शर्मा ने कमलनाथ-सिंधिया में मतभेद और विरोध की बात को नकार दिया है। दिल्ली में समन्वय समिति की बैठक से सिंधिया के जाने और बाद में मुख्यमंत्री के बयान को लेकर मंत्री शर्मा ने इंदौर में कहा कि कांग्रेस में ऑल इज वेल है। किसी तरह का विवाद नहीं है। उधर, इंदौर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी जल्दी ही अध्यक्ष की नियुक्ति की उम्मीद जताई है।

सीएम-सिंधिया में अच्छी अंडरस्टेंडिंग

मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अच्छी अंडरस्टेंडिंग है। समय-समय पर सिंधिया सरकार को सुझाव भी देते हैं और उन पर अमल भी होता है। दोनों के बीच मनमुटाव की बातें भाजपा द्वारा उड़ाई गई हैं। दोनों के बीच हर समय चर्चाएं होती हैं और किसी प्रकार का मनमुटाव नहीं हैं।

- नरेंद्र सलूजा, मीडिया समन्वयक, पीसीसी अध्यक्ष (कमलनाथ समर्थक)

कांग्रेस पार्टी के हर नेता-कार्यकर्ता का एक ही लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश में जनता दिए गए बहुमत का आदर करते हुए प्रदेश का नवनिर्माण करे। दोनों नेताओं के बीच कोई विवाद की स्थिति नहीं है। कांग्रेस पार्टी और सरकार आम आदमी के हित में काम करने के लिए तत्पर है।

- पंकज चतुर्वेदी, प्रदेश प्रवक्ता, पीसीसी (सिंधिया समर्थक)

Posted By: Hemant Upadhyay