भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश की चार सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस दमोह फार्मूले पर काम कर रही है। दमोह में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस बार भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ और कुछ नेताओं की सभाओं को छोड़कर बाकी नेता जमीनी काम में जुटे हैं। पार्टी के सभी विधायक सक्रिय हैं और व्यक्ति गत संपर्क, नुक्कड़ सभाओं जैसे छोटे आयोजनों के माध्यम से मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है। कई मौकों पर कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पार्टी नेताओं को दिखावा करने की जगह मैदानी स्तर पर काम करने के निर्देश जारी किए हैं। खंडवा की लोकसभा और पृथ्वीपुर, जोबट और रैगांव विधानसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव से सत्ता के समीकरण भले ही प्रभावित न हों, लेकिन भाजपा और कांग्रेस के लिए साख का सवाल जरूर है।

भाजपा की ओर से मंत्रियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मोर्चा संभाल रखा है। दोनों पार्टियों का फोकस बूथ को मजबूत करना है। भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेताओं के दौरे चल रहे हैं। इससे उलट कांग्रेस ने दमोह के उपचुनाव में मिली जीत के आधार पर चारों सीटों के लिए नीति तय की है। इसमें डोर टू डोर मतदाताओं से मुलाकात और नुक्कड़ सभाओं पर जोर दिया गया है। कांग्रेस विधायक इन क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन वे बड़ी सभाओं से परहेज कर रहे हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस की ओर से सभाओं का अधिक आयोजन किया जाता है तो आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो जाती है। मतदाताओं से प्रत्यक्ष मुलाकात के दौरान भाजपा सरकार की खामियों को लोग गंभीरता से सुनते हैं और सहमत होते हैं। उधर, कमल नाथ हर बूथ की निगरानी कर रहे हैं। हर दिन उनके पास बूथ स्तर की रिपोर्ट पहुंच रही है। इसका लाभ यह हो रहा है कि पार्टी की ओर से तय किए फार्मूले पर तेजी से काम हो रहा है।

उपचुनाव वाले क्षेत्रों में कांग्रेस को मिल रही बढ़त से भाजपा परेशान है। मुख्यमंत्री की सभाओं में कम उपस्थिति से साबित हो रहा है कि लोग कांग्रेस के पक्ष में हैं। - केके मिश्रा, महामंत्री (मीडिया), प्रदेश कांग्रेस

Posted By: Prashant Pandey

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