भोपाल । कोरोना की विश्वव्यापी आपदा ने देश की डाक वितरण व्यवस्था को भी पंगु बना दिया है। सारी व्यवस्था ठप पड़ी है, देशभर में लॉक डाउन के चलते मध्यप्रदेश में भी चिट्ठी, पत्र और पार्सल आदि का वितरण बंद है। संभवतः पहली बार ऐसी नौबत आई है, लॉक डाउन शुरू होते ही पार्सल और चिट्ठियां आदि जो जहां है वहीं जाम हो गए। शहरों में पार्सल और चिट्ठियों के ढेर लग गए हैं।

डाक विभाग ने भोपाल और देश के कुछ बड़े शहरों में आपातकालीन सेवाओं के तहत एक या दो चुनिंदा डाकघरों में आपातकालीन कामचलाऊ व्यवस्था शुरू करने का निर्णय किया है लेकिन जहां स्टाफ की उपलब्धता रहेगी वहीं यह वैकल्पिक व्यवस्था शुरू होगी।

मप्र में इंदौर, भोपाल,जबलपुर, ग्वालियर व सागर सहित कतिपय बड़े शहरों के मुख्य पोस्ट ऑफिस में ही गिनती के स्टाफ को बुलाकर काम चलाऊ व्यवस्था रहेगी। पार्सल वितरण का संकट विभागीय सूत्रों का कहना है कि कोरोना की आपदा के दौरान केंद्र सरकार ने डाक विभाग की सेवाओं को आपातकालीन सेवाएं घोषित किया है। तीन सप्ताह का लॉक डाउन है, इसलिए अत्यावश्यक कामकाज के लिए आपातकालीन व्यवस्था शुरू की जा रही है।

हालांकि अब नागरिकों के सामने संचार की समस्या नहीं है। हर अमीर-गरीब के पास मोबाइल और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, जरूरी दस्तावेज, पार्सल और सरकारी डाक को देश-विदेश में पहुंचाने की मुख्य समस्या है। दूसरे शहरों से आकर पड़े पार्सल के वितरण का भी संकट है।

विभाग के निदेशक एस. शिवराम ने बताया कि ऐसी स्थिति वे पहली बार देख रहे हैं। कोरोना संक्रमण के खतरे से सभी डरे हुए हैं। प्रदेश के चुनिंदा बड़े शहरों में कोई एक ऐसा डाकघर जो सबके लिए सुविधाजनक हो वहां स्थानीय स्टाफ को बुलाकर काम शुरू करा रहे हैं। उन्हें सुरक्षा के लिए मास्क और सैनिटाइजर देंगे।

उन्हें ग्राहकों से सुरक्षित दूरी बनाकर काम करने को कहा गया है लेकिन डाक वितरण व्यवस्था बहाल करना फिलहाल संभव नहीं है। छोटे शहरों और गांवों में दूर से पहुंचने वाले स्टाफ के सामने आने- जाने का संकट है इसलिए वहां व्यवस्थाएं जुटाना मुश्किल है।

Posted By: Sandeep Chourey

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