Coronavirus Madhya Pradesh News: अंजली राय, भोपाल। कपड़े से बना सामान्य मास्क भी एक खास युक्ति के साथ अब कोरोना से 95 फीसद तक बचाव कर सकेगा। इस पर नैनो कण (नैनोपार्टिकल्स) की परत चढ़ी होगी और कीमत भी पांच से 10 रुपये के बीच होगी। भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के नैनो टेक्नोलॉजी विभाग ने इस तरह का मास्क बनाया है।

संक्रमण को रोकने के लिए मास्क पर दो तरह के नैनो कणों की परत चढ़ाई जाएगी। वायरस इनके संपर्क में आने के बाद मर जाएगा। इस मास्क को धोकर अधिकतम तीन बार उपयोग किया जा सकेगा। कई शासकीय विभागों से मंजूरी मिलने के बाद इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा।

नैनो टेक्नोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गगनकांत त्रिपाठी ने यह तकनीक विकसित की है। उन्होंने बताया कि यह मास्क एन-95 से कई गुना सस्ता और सुरक्षित है। इसे पहनने से वायरस न तो मास्क के अंदर जाएगा और न ही मुंह या नाक से निकले वायरस को यह बाहर फैलने देगा। मास्क को तैयार करने में बिस्मथ ऑक्सिक्लोराइड (बीआइओसीआइ) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड (टीआइओटू) जैसे नैनो कणों का उपयोग किया गया है।

यह शोध इंडोनेशिया के जर्नल ऑफ अप्लाइड साइंस इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी एंड एजुकेशन में प्रकाशित हो चुका है। इस मास्क के पैटर्न की स्वीकृति के लिए आवेदन किया जा रहा है। इस तकनीक को विश्वविद्यालय की ओर से भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) को भेजा जाएगा। यहां से स्वीकृति मिलने के बाद यह बाजार में उपलब्ध हो जाएगा।

मास्क पर चिपकते ही मर जाएंगे वायरस

डॉ. त्रिपाठी का कहना कि सूती कपड़े के मास्क पर बीआइओसीआइ और टीआइओटू नैनो कणों की परत चढ़ाई जाती है। नैनोपार्टिकल्स का आकार एक से सौ नैनोमीटर तक होता है। अत्यंत सूक्ष्म होने से इन्हें मनुष्य की आंखें नहीं देख पातीं। इनके कई विशेष भौतिक व रासायनिक गुण होते हैं। नैनो कणों के चुंबकीय प्रभाव के कारण वायरस इनके संपर्क में आते ही चिपक जाते हैं। तीन से चार सेकंड में निष्क्रिय या मर जाते हैं। ये नैनो कण त्वचा को भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते। ये कण वातावरण के अनुकूल हैं। इन पर सूर्य की पराबैंगनी किरणों का प्रभाव भी नहीं पड़ता है।

नैनो कणों का उपयोग कॉस्मेटिक क्रीम में भी

डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक बीआइओसीआइ और टीआइओटू नैनो कणों का उपयोग कॉस्मेटिक क्रीम में पहले से किया जाता रहा है। इनका उपयोग प्रमाणित है। इसके वायरस रोधी कारकों की वजह से मास्क पर इनकी परत का प्रयोग किया गया। इसे तैयार करने में करीब एक साल का समय लगा।

इनका कहना है

- नैनोपार्टिकल्स से बना मास्क सुरक्षित एवं कारगर है। यह शरीर से निकलने वाले कोरोना सहित अन्य वायरस को फैलने से रोकता है।

-प्रो.(डॉ.) मूर्ती चावेली यादव, प्रोफेसर, नैनो टेक्नोलॉजी एवं डायरेक्टर, एसवीआरएम यूनिवर्सिटी, नागरम,आंध्र प्रदेश

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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