भोपाल ( नवदुनिया प्रतिनिधि)। पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर जोन से होकर चौबीस घंटे में 570 ट्रेनें गुजर रही हैं। लाखों यात्री रोजाना सफर कर रहे हैं। इनमें से हजारों यात्री ऐसे हैं जो ट्रेनों के अंदर प्रवेश करने के बाद मास्क का उपयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे यात्रियों से मास्क का उपयोग कर रहे दूसरे यात्रियों को खतरा है। मास्क नहीं पहनने वालों पर रेलवे की नजर है। जोन ने अप्रैल माह में 1127 यात्रियों को बिना मास्क के चिन्हित किया और उनसे 1.16 लाख रुपये जुर्माना वसूला है। रेलवे का दावा है कि उसकी तरफ से लगातार जन जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है तब भी बाकी के यात्री सबक नहीं ले रहे हैं। देखने में आ रहा है कि यात्री स्टेशन के अंदर प्रवेश करने से लेकर प्लेटफार्मों में भ्रमण करने के दौरान तो मास्क लगाकर रखते हैं लेकिन जैसे ही ट्रेनों के अंदर प्रवेश करते हैं मास्क निकालकर रख लेते हैं।

यह स्थिति तब है जब कोरोना से कोरोड़ों लोग संक्रमित हो गए और लाखों की जान चली गई। तब भी लोग है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जागरुक यात्रियों का कहना है कि ऐसे यात्रियों में शिक्षा की कमी और समाज के प्रति कमजोर सोच होने के कारण यह स्थिति बन रही है।

कहां कितने यात्री बिना मास्क के मिले

पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर जोन के मुख्य प्रवक्ता राहुल जयपुरिया ने बताया कि भोपाल रेल मंडल में 306यात्रियोें से 31750, जबलपुर मंडल में 512 यात्रियों से 53900 रुपये और कोटा मंडल में 309 यात्रियों से 30900 रुपये जुर्माना वसूला है। ये यात्री ट्रेनों के अंदर और स्टेशन परिसरों में बिना मास्क के मिले थे।

ट्रेन में चढ़ते ही निकाल लेते हैं मास्क

स्टेशन के अंदर प्रवेश करने से लेकर प्लेटफार्मों पर घुमने तक ही ज्यादातर यात्री मास्क का उपयोग करते हैं। जैसे ही ट्रेनों के अंदर चढ़ते हैं तो मास्क उतारकर जेब में रख लेते हैं। असल में स्टेशन के अंदर बिना मास्क के प्रवेश नहीं कर सकते। स्टेशन परिसर में घुमने के दौरान भी मास्क नहीं लगाने पर कार्रवाई का भय रहता है लेकिन ट्रेन के अंदर उतना भय नहीं रहता है।

दूसरों की लापरवाही, सावधानी रखने वालों पर भारी

ट्रेनों के अंदर दूसरों की लापरवाही सावधानी रखने वालों पर भी भारी पड़ रही है। भोपाल से मुंबई का सफर करने वाले यात्री दिनेश रघुवंशी का कहना है कि मैंने पूरे सफर के समय मास्क लगाया, लेकिन कोच के अंदर ज्यादातर यात्री बिना मास्क के बैठे थे। कई तो एक से दूसरे कोचों में आना—जाना कर रहे थे। जब मैं मुंबई से वापस भोपाल लौटा तो एक सप्ताह बाद संक्रमित हो गया। जबकि मैं अपनी बर्थ को सैनिटाइज करके बैठा, जहां गया था वहां रात नहीं रूका, भोजन भी अपने पास का ही किया, दूर से मिलना जुलना किया, उसके बाद भी संक्रमित हो गया। यात्री का कहना है कि ट्रेन में खुद कितनी ही सावधानी रख लें, दूसरे यात्री बिना मास्क के घुमेंगे तो बचना मुश्किल होगा।

रेलवे अपनाएं ये तरीकें

— जानकारों का कहना है कि रेलवे द्वारा कुछ समय के लिए ट्रेन के टीटीई को ही अधिकार दे देना चाहिए कि जो भी बिना मास्क के मिले, उन से जुर्माना वसूला जाए।

— रेलवे की टीम द्वारा औचक निरीक्षण को बढ़ाया जाए, ऐसे यात्रियों पर सख्ती की जाए।

— आरपीएफ व जीआरपी द्वारा भी ऐसे यात्रियों की तेजी से पहचान की जाए।

— ट्रेनों के अंदर भी रेलवे की तरफ से अनाउंसमेंट कर यात्रियों को जागरुक किया जाए।

Posted By: Lalit Katariya

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